नई दिल्ली। राजस्थान की राजे सरकार एक बार फिर विवादों में घिर सकती हैं। राज्य सरकार अपने मुख्यमंत्री के लिए एक ऐसा प्लेन देख रही है जो सीधे यूरोप तक उड़ान भर सके और उसकी फ्लाइंग रेंज उन एग्जिक्यूटिव जेट्स से अधिक हो, जिनका प्रयोग प्रधानमंत्री अपनी घरेलू यात्रा के दौरान करते हैं।इन शर्तों वाली टेंडर प्रक्रिया के कारण एक और विमानन संबंधी विवाद खड़ा हो सकता है। इससे पहले भी राजे सरकार द्वारा घोटाले में फंसी अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर को वरीयता दी गयी थी जिसे लेकर काफी विवाद खड़ा हुआ था। हालांकि, उसके बाद अगस्ता का टेंडर वापस ले लिया गया था।अंग्रेजी अखबार इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार, राजे सरकार ने पिछले साल के अंत में लीज पर एग्जिक्यूटिव जेट लेने के लिए एक और टेंडर जारी किया था। टेंडर के लिए जो शर्तें रखी गई थीं उसके अनुसार, राज्य सरकार घरेलू यात्रा के लिए केंद्र सरकार के पास मौजूद प्लेन से अधिक पावरफुल जेट चाहती थी। प्रधानमंत्री इसके लिए एंब्रेयर जेट्स का इस्तेमाल करते हैं, जिनका रखरखाव भारतीय वायुसेना करती है।राजस्थान सरकार के नागर विमानन निदेशालय ने 28 नवंबर, 2016 को एक टेंडर जारी किया, जिसमें लंबी अवधि के आधार पर मध्य आकार का एयरक्राफ्ट हायर करने में दिलचस्पी दिखाई थी। इसके लिए फ्लाइंग रेंज की जो सीमा दी गई थी, वह मुख्यमंत्री के लिए तय नियमों से कहीं अधिक थी।राजस्थान सरकार ने जिस प्रकार से एयरक्राफ्ट के लिए टेंडर दिया था, आमतौर पर उसका प्रयोग राज्य सरकार के वीआईपी नहीं करते हैं। उदाहरण के तौर पर राजे सरकार 3200 नॉटिकल माइल रेंज वाला एयरक्राफ्ट चाहती थी, जबकि प्रधानमंत्री के एंब्रेयर जेट की रेंज भी इतनी नहीं है। यहां तक कि राजस्थान की राजधानी जयपुर से केरल की राजधानी कोच्चि की दूरी 2,300 नॉटिकल माइल ही है। टेंडर में यह भी लिखा था कि प्लेन 15 साल से अधिक पुराना नहीं होना चाहिए, जबकि वीआईपी यात्रा के लिए प्रयोग किए जाने वाले दूसरे प्लेन 5 साल से अधिक पुराने नहीं होते हैं।

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