नई दिल्ली । आपने चुनावों में मृत व्यक्ति के नाम पर फर्जी वोट पड़ने की बात तो सुनी होगी, लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में ‘मुर्दा’ भी अपनी किस्मत आजमाएगा। कागजों में मृत घोषित संतोष मूरत सिंह ने वाराणसी के चिरईगांव विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया है।जंतर-मंतर पर पिछले चार सालों से खुद को जिंदा साबित करने के लिए आंदोलनरत संतोष मूरत वर्ष 2012 में हुए राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी पर्चा भर चुके हैं।

फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर के रसोइया रहे संतोष वाराणसी के ही रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि भले ही उनके क्षेत्र के लोगों ने उनको भुला दिया है, लेकिन वह उन्हें नहीं भूले हैं। इसलिए विधायक बनकर उनकी सेवा करना चाहते हैं।

2003 मुंबई धमाके में मूरत को दिखाया मृत

संतोष ने बताया कि मुंबई में वर्ष 2003 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में उनको मृत दिखाकर उनके पट्टीदारों ने बनारस के चौबेपुर के छितौनी में स्थित उनकी 18 बीघा पुस्तैनी जमीन को अपने नाम करा लिया।

नाना और अखिलेश यादव की कोशिश भी नहीं लाई रंग

नाना पाटेकर का साथ और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का आश्वासन मिलने के बाद भी वह अब तक खुद को जिंदा साबित नहीं कर पाए हैं।

नाना ले गए थे मुंबई

संतोष ने बताया कि फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर 2003 में रिलीज हुई फिल्म ‘आंच’ की शूटिंग के लिए वर्ष 2000 में उनके गांव पहुंचे थे। उसी दौरान नाना पाटेकर से उनकी मुलाकात हुई और वह अपने साथ मुंबई ले गए।

दलित युवती से विवाह करने पर ग्रामीणों ने किया बहिष्कार

वहां मराठी दलित युवती से उन्होंने प्रेम विवाह कर लिया। विवाह बाद जब वह गांव लौटे तो दलित लड़की से शादी के कारण गांव वालों ने उनका बहिष्कार कर दिया।

माता-पिता भी नहीं हैं दुनिया में

माता-पिता का निधन पहले ही हो चुका था। ऐसे में पट्टीदारों ने मुंबई ट्रेन धमाकों में उन्हें मृत दिखाकर गांव में तेरहवीं कर दी और उनकी जमीन अपने नाम करा ली।

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