कैसे करें परीक्षाओं की तैयारी

नई दिल्ली, लाइव (सुखबीर सिमी )परिक्षा, एक ऐसा शब्द जिस से हर बच्चा भली भांति वाकिफ हैं। कई विद्यार्थी परीक्षाओं के लिए बड़े ही उत्सुक्त होते हो क्योंकि उनके लिए यही मौका होता है अपनी प्रतिभा का मूल्यांकण कर के सर्वश्रेष्ठ बनने का। वहीँ ज़्यादातर विद्यार्थयों के लिए परीक्षाएं किसी भयावह सपने से कम नहीँ। आखिरकार साल के 365दिनों में जो शिक्षा आपने ग्रहण की, आप उसे किस हद तक समझ पाए हैं , ये उसकी कसौटी होती है। एक तो सभी विषयों की तयारी की टेंशन और ऊपर से पेरेंट्स का प्रेशर,  अक्सर बच्चों को मानसिक तौर पर कमज़ोर कर देता है। यही वजह है कि परीक्षाओं के समय बच्चे कमज़ोर या बीमार पड़ जाते हैं। खासकर भारत जैसे देश में, जहाँ परीक्षा सिर्फ बच्चे की नहीं होती बल्कि पूरे परिवार की होती है।  परीक्षाएं शुरू होते ही घर का माहौल बेहद संजीदा हो जाता है , कोई ऊँची आवाज़ में बात करने से भी कतराता है कि कहीं बच्चे की पढ़ाई डिस्टर्ब न हो जाए।

परीक्षाओं के तनाव को कैसे कम किया जाये, इसके लिए बच्चों और उनके पेरेंट्स को कुछ खास बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है।

परीक्षाएं शुरू होने से पहले ही बच्चों पर बहुत प्रेशर बन जाता है , ऐसे में पेरेंट्स चाहते हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा समय बच्चे पढ़ाई में लगाएं, लेकिन लगातार पढ़ाई करने से भी एक लेवल पर आ कर स्मरण शक्ति का सैचुरेशन हो जाता है, इसीलिए तो आपने भी देखा होगा कि कॉन्टीनयू पढ़ाई करते करते एक टाइम ऐसा आता है कि आपको कुछ याद ही नहीँ हो पाता। अब जैसे ज़्यादा खाना खाने के बाद उसे पचाने कि ज़रुरत होती है और हम व्यायाम करते हैं ठीक वैसे ही पढ़ी हुई चीजों को याद रखने के लिए दिमाग को भी ज़रुरत होती है व्यायाम की, और ये व्यायाम हो सकता है एक ब्रेक जिसमे आप कुछ देर अपनी मनपसंद एक्टिविटी करें। अब ये एक्टिविटी कोई गेम खेलना, म्यूजिक सुनना, डांस करना, खाना बनाना या फिर कुछ देर के लिए सोना भी हो सकता है। क्योंकि इस से आपके ब्रेन को टाइम मिल जाता है पढ़े हुए सिलेबस को एक मैमोरी में सेव करने का और फ्रेश स्पेस क्रिएट करने का जहाँ आप नयी चीजें पढ़ सकें। इसलिए पेरेंट्स को चाहिए की कुछ घंटे पढाई के बाद बच्चों को उनकी बाकी डेली एक्टिविटीज़ के लिए कुछ समय देना चाहिए और ऐसे में घर से बहार पार्क में जाना और प्रकृति के साथ समय बिताना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

ये तो थी पढ़ाई के लिए समय देने की बात, मैंने पहले भी ज़िक्र किया कि भारत में परीक्षाएं सिर्फ बच्चों तक ही सीमित नहीं होतीं बल्कि पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी बन जाती है बच्चों को पढ़ाई में मदद करने की। और ये भी परमसत्य है की भारत में त्यौहार हो या इलेक्शन हर एक्टिविटी को धर्म से जोड़ कर देखा जाता है, बस तो फिर परीक्षाएं पीछे कैसे रह जाएं। मार्च से अप्रैल तक हर विद्यार्थी किसी न किसी देवी देवता को खुश करने में लगा रहता है। कुछ तो पढ़ाई करते समय भगवान् की तस्वीर सामने रखते हैं, कुछ परीक्षा देते समय उत्तर पत्रिका के फ्रंट पेज पर भगवान् का नाम लिखते हैं, तो कुछ विद्यार्थी ऐसे भी होते हैं जो सारा साल भले ही भगवान् को याद न करें लेकिन रिजल्ट आने तक हर ज़ोर मंदिर ज़रूर जाते हैं। खैर ये तो सब के अपने अपने धार्मिक विचार हैं। पर बात जहाँ ज्ञान, बुद्धि और विध्या की हो वहां माँ सरस्वती की उपासना ही उत्तम परिणाम दिला सकती है। माँ सरस्वती का यह मंत्र विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति बढ़ाने और अच्छे मार्क्स दिलाने में उपयोगी है।

 

सरस्वती नमस्तुभयं

वरदे कामरूपिणी

विद्यारमबम करिष्यामि

सिध्दिर भवतहुमे साधा

 

पर यह कोई राम बाण नहीँ, याद रहे मेहनत ही उन्नति की एकमात्र चाबी है।

 

कई विषयों की परीक्षाओं की तयारी करने के लिए एक टाइम टेबल बहुत ही आवश्यक होता है जिस से सारे विषयों को एक समान समय दिया जा सके, तो जैसे ही आपकी डेटशीट आजाए, सबसे पहले ये गौर करना की जिस सब्जेक्ट में आप कमज़ोर हैं उसका सिलेबस सब से पहले पढ़ने का समय निकाला जाये। वो परीक्षा बेशक अंत में हो पर तैयारी पहले ही कर लेना ताकि रिवाइज़ करने का समय मिल जाये और आप अच्छे मार्क्स स्कोर कर सकें।  ऐसे ही जिस सब्जेक्ट में आप अच्छे हैं उसे अपने कमज़ोर सब्जेक्ट के साथ एडिशनल तौर पर एक-एक घंटा दें। ऐसा करने से एक तो आप की स्टडी मोनोटोनी ब्रेक होगी और दो सब्जेक्ट की तैयारी साथ-साथ हो जाएगी जिस से आपका समय बचेगा।

तो उम्मीद है की ये कुछ टिप्स आपके काम ज़रूर आएंगे और इस बार रिकॉर्ड ब्रेकिंग नंबर स्कोर कर के अपने टीचर्स और पेरेंट्स को दिखा दीजिये की आप भी किसी से कम नहीं। परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएं।

सुखबीर सिमी

टीवी एंकर

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