नई दिल्ली । अरविंद केजरीवाल मानहानि मामले में लगातार दूसरे दिन सुनवाई जारी है। मंगलवार को फिर अरुण जेटली दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे। इस मामले में केजरीवाल के वकील राम जेठमलानी जेटली आज फिर क्रॉस इग्जामिनेशन कर रहे हैं।

रामजेठमलानी ने मंगलवार को भी जेटली पर निशाना साधा और जिरह के दौरान तंज कसते हुए कहा कि जो नेता अपना चुनाव भी हार गया हो उसकी क्या इज्जत? आज हुई सुनवाई में रामजेठ मलानी ने फिर तीखे सवाल किए। उन्होंने पूछा कि क्या आपको डीडीसीए के नियमों के बारे में पता है? इस पर अरुण जेटली कुछ देर तक शांत रहे। वहीं, उन्होंने कहा कि लोग कुछ भी कहें फर्क नहीं पड़ता, लेकिन जब कोई सीएम बोलता है तो उसकी क्रेडिबिलिटी बढ़ जाती है।

रामजेठ मलानी v/s अरुण जेटली

रामजेठ मलानी: आपको पीएम ने वित्त मंत्री बने रहने दिया, क्योंकि आपने ये भरोसा दिया था कि इन आरोपों पर आप न्यायिक कारवाई करेंगे?

अरुण जेटली : मैं इस बात को नकारता हूं।

रामजेठ मलानी: क्या आप पत्रकार मधु किश्वर को जानते हैं?

अरुण जेटली : मैं एेसा नहीं समझता।

रामजेठ मलानी: उन्होंने एक लेटर लिखा था कि जेटली और उनके परिवार ने डीडीसीए से रुपया कंपनियों में भेजा है?

अरुण जेटली : मुझे नहीं पता ये उन्होंने कब कहा?

रामजेठ मलानी: ये दिसंबर 2015 का एक ट्वीट है और केजरीवाल ने सिर्फ इसे रिट्वीट किया था।

अरुण जेटली : केजरीवाल ने गंभीर और दुर्भावनापूर्ण झूठ बोलने का काम किया कि मेरी पत्नी और बेटी के लिंक फर्जी कंपनियों से हैं। ये काफी निचले दर्जे का काम था।

रामजेठ मलानी: आपने शुरुआत करने वाली किश्वर के ट्वीट को देखने की जरूरत महसूस नहीं की।

अरुण जेटली : पब्लिक लाइफ में रहने वाले लोगों के लिए सोशल मीडिया पर गैरजिम्मेदाराना बयान आते रहते हैं, लेकिन जब कोई मुख्यमंत्री एेसे बयानों को अपनाता है तो ये गंभीर अपराध हो जाता है। क्योंकि फिर ये बयान सही माने जाते हैं। बार-बार इन झूठे आरोपों को लगाने पर मैं कानूनी कारवाई को मजबूर हुआ।

रामजेठ मलानी: आपकी केजरीवाल से कोई दुश्मनी नहीं है?

अरुण जेटलीः मेरी कोई निजी दुश्मनी नहीं है, लेकिन मुझे उनका नहीं पता। एक बार वो DDCA के अध्यक्ष का चुनाव लड़े और हार गए। यहां तक कि लोकसभा चुनाव में उन्होंने मेरे खिलाफ जमकर प्रचार किया था।

रामजेठ मलानी: आप अमृतसर चुनाव की बात कर रहे हैं? क्या ये सही नहीं कि पहली बार आप गुजरात के अलावा कहीं और से चुनाव लड़ना चाहते थे?

(इस सवाल पर अरुण जेटली के वकीलों ने विरोध किया, लेकिन जेटली ने कहा हां।)

रामजेठ मलानी: आप अमृतसर से चुनाव लड़ रहे थे तो भी गुजरात से राज्यसभा सदस्य थे ?
अरुण जेटली : हां।

रामजेठ मलानी: क्या ये आपका पहला लोकसभा चुनाव था?

अरुण जेटली : हां मैं पहली बार लड़ा था।

रामजेठ मलानी: तो आप पहली बार लोकतंत्र में अपनी ग्रेट रेपूटेशन को टेस्ट कर रहे थे।

अरुण जेटली : चुनावों में कई फैक्टर होते हैं। सिर्फ प्रत्याशी के रेपूटेशन का सवाल नहीं होता। याद रहे कि केजरीवाल भी 2014 लोकसभा का चुनाव वाराणसी में 3.50 लाख वोटों से हारे थे।

रामजेठ मलानी: मेरी सलाह मानिए, जो पूछा जा रहा है, वही जवाब दीजिए। क्या आप एक लाख से ज्यादा वोटों से हारे।
अरुण जेटली : सही है।

रामजेठ मलानी: आप लोकसभा चुनाव लड़े, जबकि राज्यसभा में दो साल बचे हुए थे?

अरुण जेटली : राज्यसभा के कार्यकाल में चार साल बचे थे।

रामजेठ मलानी: इसकी क्या वजह है कि बिशन सिंह बेदी ने आपके खिलाफ PM को गंभीर शिकायत दी।
अरुण जेटली : मैं ऐसोसिएशन का अध्यक्ष था और बेदी को चीफ कोच बनाया गया था। उनका कार्यकाल खत्म हो गया था इसके बावजूद मैं नरमी दिखाता रहा।

रामजेठ मलानी: क्या आपने बेदी की चिट्ठी देखी?
अरुण जेटली : मुझे याद नहीं है। जब PM ने शपथ ली तो मैं BCCI और डीडीसीए दोनों से अलग हो गया।

रामजेठ मलानी: क्या पीएम ने आपको ये लैटर दिखाया था। क्या आप इसे पढ़कर बता सकते हैं कि इसमें क्या गलत लिखा है?
अरुण जेटली : इस लेटर में मेरे बारे में लिखी बातों से मैं इनकार करता हूं। मैंने वित्त मंत्री या संसद सदस्य रहते वक्त कभी भी मंत्रालय या विभाग का सहारा नहीं लिया। मैंने कंपनी अफेयर्स का मंत्रालय संभाला, लेकिन कभी भी डीडीसीए संबंधी कोई फाइल या कागजात मेरे सामने नहीं आए। ना ही मैंने इससे संबंधी कोई सवाल पूछा, इसलिए हितों के टकराव का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।

रामजेठ मलानी: मिस्टर जेटली मैंने ये नहीं पूछा कि आपने लैटर के बाद क्या किया। ये जानना चाहते हैं इसमें कौन सी बात गलत है?
अरुण जेटली : मैंने साफ जवाब दिया है कि कोई हितों का टकराव नहीं था।

रामजेठ मलानी: आप जानते हैं कि लेटर में लिखी बातें उस वक्त की हैं जब आप एसोसिएशन का हिस्सा थे?
अरुण जेटली : जहां तक मेरी जानकारी है, ये बातें झूठी हैं। मैं BCCI और DDCA से लिंक खत्म करना चाहता था। 2014 के किसी वक्त में एसोसिएशन से जुड़ा था, लेकिन वो कोई पद नहीं था बल्कि एक तरह से बिना कार्यभार वाला काम था। मेरे आग्रह पर वो भी खत्म हो गया।

रामजेठ मलानी: क्या आपके पास एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य के अधिकार थे?
अरुण जेटली : एकदम नहीं बता सकता, लेकिन मैंने कभी एग्जीक्यूटिव कमेटी की मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

रामजेठ मलानी: आपने मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया?
अरुण जेटली : मैं याद कर रहा हूं कि एक बार मैं मीटिंग में गया था और इसके बाद मैंने इससे अलग करने का आग्रह किया था।

रामजेठ मलानी: अब आपने ये लेटर पढ़ लिया। इसमें क्या ऐसा फैक्ट है जिससे गुस्सा होकर आपने मुझ पर कारवाई शुरू की?
अरुण जेटली : नहीं

रामजेठ मलानी: क्या पीएम को आपके इरादे पता थे? क्या आपने उन्हें बताया कि लेटर में लगे आरोपों पर आप अपनी रेपूटेशन को बनाए रखेंगे?

अरुण जेटली : ये लैटर जनवरी 2014 का है, जबकि मैंने कानूनी कार्रवाई दिसंबर 2015 में  की। मैं 2014 में सूचना प्रसारण विभाग का प्रभारी बना। मई 2014 में मैं प्रभारी नहीं था। अब मैं फाइनेंस एंड कोरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय का प्रभारी हूं।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 और 17 मई को होगी, जिसमें जिरह जारी रहेगी। इससे पहले सुनवाई के पहले दिन सोमवार को जिरह में जेटली से 52 तीखे सवाल पूछे गए थे। सोमवार को हाई कोर्ट में मानहानि के एक ऐसे ही मामले में हुई जिरह इसलिए रोचक बन गई क्योंकि इसमें आमने-सामने देश के दो दिग्गज वकील अरुण जेटली और वयोवृद्ध राम जेठमलानी थे। अरुण जेटली व राम जेठमलानी के बीच रोचक जिरह हुई।

तीन घंटे की लंबी जिरह में जेठमलानी के कुछ चुटीले सवालों का जेटली ने जिस अंदाज में जवाब दिया उससे अदालत में अलग ही माहौल बन गया। संयुक्त रजिस्ट्रार अमित कुमार के समक्ष जेठमलानी ने जेटली से 52 सवाल पूछे। इस दौरान कई बार दोनों पक्षों के वकीलों में नोकझोंक हुई तो रजिस्ट्रार को उन्हें शांत कराना पड़ा। जेठमलानी के सवाल और जेटली के जवाब के कुछ रोचक अंश इस प्रकार हैं…।

जेठमलानी – आपने कैसे तय किया कि आपकी जो मानहानि हुई है, उसकी आर्थिक रूप से भरपाई की जा सकती है और ये मानहानि 10 करोड़ की है?

जेटली- मेरी मानहानि की क्षतिपूर्ति पैसे के आधार पर मुश्किल है। बहरहाल परिवार, दोस्तों या समाज के बीच जो मेरा महत्व या साख है, उस आधार पर 10 करोड़ का दावा किया है।

जेठमलानी-कहीं यह मामला खुद को महान समझने का तो नहीं है। ऑक्सफोर्ड व वेबस्टर डिक्शनरी का जिक्र करते हुई उन्होंने सवाल किया कि साख व प्रतिष्ठा में क्या अंतर है। आपकी याचिका के पीछे तर्कसंगत कारण तो नजर नहीं आता सिवाय इसके कि आप खुद अपने बारे में ऐसा सोचते हैं।

जेटली- मेरे सम्मान को पहुंचे नुकसान के लिए जो मैंने दावा किया है, वह उस बड़ी क्षति का एक बहुत ही छोटा सा हिस्सा है। धन से सम्मान की भरपाई नहीं हो सकती है। सम्मान खोने से व्यक्ति को दिमागी तनाव पहुंचता है और मेरे साथ भी यही हुआ है।

जेठमलानी-आप यह मानते हैं कि आप इतने महान हैं कि इसे आर्थिक तौर पर नहीं मापा जा सकता।
जेटली (भावुक लहजे में)-मेरी छवि खराब करने के लिए मेरे खिलाफ लगातार अभियान चलाया गया। इसे रोकना जरूरी था, इसलिए केस किया। पूरे राजनीतिक जीवन में कभी भी राजनीतिक आलोचना को लेकर कुछ भी नहीं कहा। इस बार मेरी निष्ठा पर सवाल खड़े किए गए। मैं 1977 से वकालत कर रहा हूं।

कल इस मुद्दे पर हुई थी बहस

जेठमलानी ने सोमवार को वित्त मंत्री और सीनियर एडवोकेट अरुण जेटली के अंग्रेजी और सिविल लॉ के ज्ञान पर अंगुली उठा दी। जेठमलानी दिल्ली हाई कोर्ट में जेटली द्वारा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कई पर दायर मानहानि के मुकदमे की सुनवाई के दौरान वित्त मंत्री से सवाल-जवाब कर रहे थे। हालांकि अदालत ने जेठमलानी के सवाल को अस्वीकार कर दिया। जेटली ने केजरीवाल तथा आम आदमी पार्टी के पाँच अन्य नेताओं पर मानहानि का मुकदमा दायर करके 10 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की है।

जेटली ने जब अदालत में खुद को 1977 से प्रैक्टिस कर रहे वकील के तौर पर पेश किया तो जेठमलानी ने उनसे कहा कि मुझे आपके सिविल लॉ के ज्ञान के बारे में ज्यादा जिज्ञासा है? जेटली ने खुद को सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह के कानूनों का अनुभवी बताया था।

इस पर जेठमलानी ने जेटली से पूछा कि जब आपको कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ है तो आप अरविंद केजरीवाल एवं अन्य से आर्थिक हर्जाना क्यों चाहते हैं? जवाब में जेटली ने कहा कि उनके सम्मान को हुई क्षति इतनी बड़ी है कि वो वित्तीय आकलन से परे है? इस पर जेठमलानी ने पूछा कि तो आप मानते हैं कि आपने ये याचिका महानता की निजी भावना के तहत दायर की है न कि वित्तीय नुकसान की वजह से?

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