चंडीगढ़। आर्थिक तंगी का सामना कर रही पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार को मामूली राहत मिली है। सरकार से पास राज्य से टैक्स के 700 करोड़ रुपये आ गए हैं । केंद्र सरकार ने भी टैक्स के हिस्से के रूप में पंजाब की बनती रकम में से 800 करोड़ रुपये राज्य सरकार को दे दिए हैं। इस तरह 1500 करोड़ रुपये की राशि हासिल कर पंजाब सरकार ने खुद को ओवरड्राफ्ट के अंतर्गत वेज एंड मीन से बाहर निकाल लिया है। किसानों और कर्मचारियों को इसका फायदा होने का आसार है।
बीते दिनों केंद्र सरकार ने पंजाब को 700 करोड़ रुपये भी दिए थे। सोमवार को पंजाब सरकार ने 80 साल से ऊपर के पेंशनरों को 6 फीसदी के दर से महंगाई भत्ता भी जारी कर दिया। उल्लेखनीय है कि सूबे की पूर्व अकाली-भाजपा सरकार ने बाजार से कर्ज उठाने की तय सीमा को दिसंबर, 2016 में ही पार कर लिया था। प्रदेश की मौजूदा वित्तीय हालत का खुलासा बीते सप्ताह राज्य विधानसभा में कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने वोट आन अकाउंट पेश करते हुए कर दिया था। सरकार का दावा था कि पूर्व अकाली-भाजपा सरकार ने जाते-जाते 11 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज भी उठाया था।
इसके चलते नई सरकार को खजाना खाली मिलने के साथ ही बाजार से कर्ज उठाने का भी तुरंत अवसर नहीं मिल सका। अब 1 अप्रैल से नए वित्त वर्ष में सरकार के लिए कर्ज की लिमिट फिर शुरू हो गई है, जो 1900 करोड़ रुपये है। वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार, धन की कमी के बढ़ रहे चौतरफा दबाव के बीच सरकार के लिए यह समस्या भी खड़ी हो गई थी कि कर्मचारियों को समय कैसे दिया जाए। लेकिन अब समस्या नहीं है। कर्मचारियों के वेतन का इंतजाम कर लिया गया है। विभाग अब यह मानकर चल रहा है कि अगले कुछ दिनों में राज्य से टैक्स का पैसा और केंद्र सरकार से टैक्स के हिस्से की रकम मिलेगी, जिससे स्थिति में लगातार सुधार होता जाएगा।

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