नई दिल्ली । कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 92वीं बटालियन के कमांडेंट चेतन कुमार चीता की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है और उम्मीद जताई जा रही है की उनको जल्द ही AIIMS स छुट्टी मिल सकती है।

चेतन कुमार चीता ने अपनी तैनाती के महीने के छोटे से समय में अभूतपूर्व साहस का परिचय दिया। वो कश्मीर में आतंकवादियों के बीच दहशत का पर्याय बन चुके थे। उन्होंने 20 जनवरी को बांदीपोरा इलाके में आतंकियों से मुठभेड़ में मुम्बई हमलों के मास्टर माइंड जाकिर उर रहमान लखवी के भांजे और लश्कर कमांडर अबू मुसैब को मार गिराया था।इस घटना के ठीक 20 दिन बाद चेतन चीता को हंदवाड़ा के खान मोहल्ले में आतंकवादियों के छिपे होने की खबर मिली। बिना समय गंवाए चेतन चीता अपनी टीम के साथ आतंकियों को पकड़ने निकल पड़े। आतंकियों के साथ इस मुठभेड़ में चेतन के शरीर में कुल नौ गोलियां लगी थी। उनकी ओर से 16 रांउड गोलियां फायर की गईं। जबकि आतंकियों ने 30 राउंड गोलियां चलाईं।एनकाउंटर में घायल चेतन कुमार चीता को प्राथमिक इलाज के लिए श्रीनगर स्थित सेना के 92 बेस हॉस्पिटल में लाया गया। जहां से एयरलिफ्ट करके उन्हें दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां 14 फरवरी से उनका इलाज जारी है।
मौत को मात देने वाले सेना के वीर जवान चेतन कुमार चीता की तुलना सियाचिन में तैनात हनुमंथप्पा से की जा रही है। हनुमंथप्पा वही बहादुर सैनिक हैं, जो सिचाचिन में अपने मोर्चे पर तैनाती के दौरान एक हिमस्खलन में बर्फ के नीचे छह दिनों तक दबे रहे। उन्हें मलबे से जीवित बाहर निकाला गया। हालांकि इस दौरान शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था, जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी। हनुमंथप्पा की तरह चेतन कुमार चीता भी नौ गोलियां लगने के बाद भी मौत को मात देने में कामयाब रहे। इस मजबूत इच्छाशक्ति की वजह से उनकी तुलना हनुमंथप्पा से की जा रही है।मुठभेड़ में आतंकियों की ओर से चेतन कुमार चीता पर एक साथ 30 गोलियां दागी गईं, जो उनके शरीर को छलनी कर गईं। एक गोली चेतन के सिर में लगी, जो सिर की हड्डी को चीरकर दाई आंख को फोड़ते हुए गाल को फाड़कर निकल गई। गोली ब्रेन को छूकर निकल गयी, जिससे ब्रेन का एक हिस्सा डैमेज हो गया।एक गोली दाएं हाथ में, एक बाएं हाथ में, एक दाएं पैर में और दो गोलियां कमर के निचले हिस्से में लगीं। कुल 9 बुलेट चेतन के शरीर में लगे थे। इसके बावजूद चेतन ने आतंकवादियों से लड़ते हुए 16 राउंड फायर किए। चेतन ने आतंकी को ढेर कर दिया।

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