वकीलों को प्रति पेशी, प्रति पटीशन के आधार पर भुगतान किया जायेगा

चंडीगढ़, / पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट और चंडीगढ़ से बाहर की अदालतों में केसों की पैरवी करने के लिये पैनल पर रखे गये वकीलों को मासिक फीस के आधार पर नही रखा जा रहा है जिस प्रकार कि कुछ मीडीया रिपोर्टो में दर्शाया गया है। आज यहां एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि पैनल के लिये चुने जाने वाले वकीलों को मासिक आधार पर भुगतान नही किया जायेगा। इस प्रकार के संकेत कुछ मीडिया रिपोर्टो में किये गये हैं। प्रवक्ता अनुसार वकीलों को प्रति पेशी, प्रति पटीशन के आधार पर भुगतान किया जायेगा। उन्होंने बताया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सरकार ने ए-1 श्रेणी के लिये वकीलों को किया जाने वाला भुगतान 2.8 लाख से बढ़ाकर 3.3 लाख रुपये कर दिया है जिसमें पैनल पर रखे जाने वाले प्रमुख वकील भी शामिल हैं। इसी तरह ही वकीलों की अन्य श्रेणीयों के भुगतान में भी बढ़ौतरी की गई है। प्रवक्क्ता अनुसार कान्फ्रैंस और पटीशन/जवाब देने/राय देने आदि के प्रारूप/निपटारे के लिये भी फीस में बढ़ौतरी की गई है। प्रवक्ता अनुसार समय-समय पर वकीलों की सेवाओं का जायजा लिया जाता है और सरकार ने अभिशेक सिंघवी, एफ एस नारीमान, दुष्यंत दवे, रामजेठ मलानी, के के वेणू गोपाल, इंद्रा जै सिंह, गोपाल सुब्रामण्यम जैसे देश के उच्च कोटि के वकीलों की सेवांए लेने का फैसला किया है ताकि सतलुज यमुना लिंक नहर सहित विभिन्न अह्म मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों में राज्य के हितों की रक्षा की जा सके।प्रवक्ता अनुसार पंजाब के एडवोकेट जनरल की आगामी राय लेकर राज्य सरकार द्वारा पैनल में शामिल विभिन्न श्रेणीयों के वकीलों की सेवांए ली जायेंगी और इसके तुरंत बाद गृह विभाग की कार्यबाद स्वीकृति ली जायेगी। प्रवक्ता अनुसार राज्य सरकार से संबंधित सभी मामलों में एडवोकेट जनरल सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और अन्य अदालतों में पंजाब सरकार की तरफ से पेश होंगे या पेश होने का प्रबंध करेंगे तथा ऐसे मामलों में कार्यबाद स्वीकृति के लिये तुरंत प्रस्ताव गृह मामले और न्याय विभाग के पास भेजेंगे। इस संबंधी जारी एक अधिसूचना अनुसार नई दिल्ली में एडवोकेट ऑन रिकार्ड तथा लीगल सैल राज्य के एडवोकेट जनरल की निगरानी अधीन कार्य करेगा।

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