नई दिल्ली ।

खुदी को कर बुलंद इतना,
कि हर तकदीर लिखने से पहले
खुदा बंदे से पूछे बता तेरी रजा क्या है।।

कहते हैं कि इरादे बुलंद हों तो किसी भी सपने को सच मे बदला जा सकता है। लेकिन ऐसा साबित करके दिखाया है 21 साल की एक लड़की ने जो अपनी आखों 80 फीसदी रोशनी गंवा चुकी है।

उसके आंखों की रोशनी मंजिल तक पहुंचन के लिए लगातार बाधा बन रही थी लेकिन उसने अपने लक्ष्य पर जिस तरह से निगाहें टिका ली उसके सामने सारी समस्याएं आंधी में करकट की तरह उड़ गईं।

प्राची सुखवानी नाम की 21 साल की लड़की ने सबसे कठिन परीक्षाओं में एक CAT (कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट) क्रैक किया है। प्राची को अब आईआईएम अहमदाबाद में एडमिशन मिला है।

प्राची महाराजा सायाजीराव यूनिवर्सिटी से बीबीए की छात्रा हैं। उन्हें आंखों के संबंधित एक गंभीर बीमारी मैकुलर डिस्ट्रॉफी नाम की बीमारी है। प्राची जब तीसरी कक्षा में थीं तभी से उनकी आंखों 80 फीसदी रोशनी जा चुकी है। इस बीमारी को एक जिनेटिक बीमारी बताया जा रहा है जिसका कोई इलाज नहीं है। लेकिन यह बीमारी उनके कामयाबी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा थी।

क्या बनना चाहती हैं प्राची
आगे अब वह क्या करना चाहेंगी इस पर प्राची का कहना है कि आईआईएस में से मैनेजमेंट की डिग्री लेने के बाद वह सबसे पहले किसी प्राइवेट कंपनी(खासतौर से मल्टीनेशनल कंपनी) में काम करना चाहेंगी। यहां कुछ दिन का अनुभव लेने के बाद वह अपनी खुद की कंपनी खोलनी चाहेंगी। एक एनजीओ बनाकर दृष्टि बाधित लोगों की मदद करना चाहेंगी।

खबरों के अनुसार, प्राची ने कैट 2016 की परीक्षा में 98.55 फीसदी नंबर हासिल किए हैं। उन्हें यह कामयाबी एक दृष्टि बाधित प्रतिभागी के रूप में हुई है।

प्राची के पिता जो कि कपड़ों का धंधा करते हैं पिछले 15 साल से प्राची को लेकर डॉक्टरों के पास घूम रहे थे। डॉक्टरों ने प्राची को सलाह दी थी वह पढ़ने के लिए विशेष तरह के लेंस का प्रयोग करें। लेकिन यह विशेष लेंस भी प्राची की समस्या कम नहीं कर पा रहे थे।

प्राची अभी बीबीए के फाइनल सेमेस्टर की परीक्षाओं में व्यस्त हैं।

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