चण्डीगढ़, 14 अप्रैल – हरियाणा में जलभराव से परेशान किसानों के लिए अच्छी खबर है कि किसानों की ऐसी जलभराव वाली भूमि जहाँ किसान कोई फसल नहीं उगा पा रहा है, उस भूमि को मत्स्य पालन विभाग पट्टे (लीज) पर लेगा। जिला झज्जर और रोहतक की जलाक्रांत से प्रभावित 16,000 एकड़ भूमि की पहचान कर ली गई है।
हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री ओम प्रकाश धनखड़ ने मत्स्य पालन की संभावनाओं को तलाशने के लिए मत्स्य, सिंचाई, पंचायत और कृषि एवं किसान कल्याण विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई। उन्होंने बताया कि पहले चरण में झज्जर और दादरी में इस क्षेत्र में पायलेट प्रोजेक्ट चलाने का निर्णय लिया गया। इस बैठक में यह सामने आया कि प्रदेश की 4.15 लाख हैक्टेयर से अधिक भूमि अत्यधिक जल ग्रस्त है, जिसमें से झज्जर और चरखी दादरी के क्रमश: 25 और 35 गांवों में करीब 16,000 एकड़ जलभराव की भूमि में किसान कोई फसल नहीं ले पा रहे हैं। इन जिलों के क्षेत्र दिल्ली के साथ होने के कारण इनका चयन किया गया है। कृषि विभाग की पैरी अर्बन एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने  की योजना में ये पायलेट प्रोजेक्ट मील का पत्थर साबित हो सकती है।
श्री धनखड़ ने कहा कि यह परियोजना उन किसानों को राहत देने वाली होगी, जिनकी भूमि जलभराव प्रभावित होने के कारण आय का साधन नहीं बन रही। योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इस नई योजना के अनुसार किसानों की ऐसी भूमि को मत्स्य पालन विभाग लीज पर लेगा। पंचायत विभाग के निर्धारित रेट के अनुसार इस जमीन को पांच साल के लिए देना होगा। इस सम्बन्ध में इच्छुक किसान अपने-अपने खण्ड विकास अधिकारी को जानकारी दे सकते है। लीज पर ली गई जमीन पर मत्स्य पालन विभाग मछली पालन की खेती कराएगा। इससे किसानों की अनुपयोगी भूमि से उनको अच्छी आय हो सकेगी।
बैठक के बाद कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने बताया कि इस योजना पर तेजी से काम करने के लिये अथॉरिटी बनाकर जिम्मेदारी भी तय की गई है। इस कमेटी में कृषि, पंचायत, सिंचाई और मत्स्य विभाग के राज्य स्तर के अधिकारी शामिल होंगे। यह कमेटी इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए तेजी से काम करेगी। कृषि विभाग के निदेशक इस कमेटी का संचालन करेंगे, जबकि मत्स्य पालन विभाग के महानिदेशक इसके सचिव होंगे।
उल्लेखनीय है कि राज्य में लगभग 4.15 लाख हैक्टेयर भूमि इस समस्या से प्रभावित है। इसमें से 62728 हैक्टेयर भूमि ऐसी है जहाँ का जमीनी पानी लेवल(चव्वा) 1.50 मीटर से कम है जबकि 3,52,204 हैक्टेयर भूमि ऐसी है जिसका लेवल 1.5 से 3 मीटर है। इस भूमि से किसान को फसल नहीं मिलती। किसानों को भूमि से आय नही होने के कारण उनके लिए यह एक चुनौती बनी हुई है। अब सरकार ने इस चुनौती को अवसर में बदलने के लिये ठोस कदम उठाये हैं।

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