मुंबई। ‘मैं दुनिया भुला दूंगा तेरी चाहत में…’ उन्हें देख कर कभी यह गीत ज़माने के होंठों पर तैरा करते पर आज इस दुनिया ने उन्हें ही भुला दिया। हम बात कर रहे हैं, आशिक़ी गर्ल अनु अग्रवाल की। 47 वर्षीय अभिनेत्री अनु अग्रवाल की कहानी बिलकुल फ़िल्मी ही है। शोहरत की बुलंदी से गुमनामी तक का उनका सफर बहुत ही दर्दनाक है लेकिन समय से उनकी लड़ाई हमें इंस्पायर भी करती है।

कहते हैं, 1990 में आई फ़िल्म ‘आशिकी’ ने लोगों को प्यार करने का एक नया स्टाइल सिखाया था। आज भी उस फ़िल्म के गीत चाहे वो ‘मैं दुनिया भुला दूंगा तेरी चाहत में’ हो या ‘धीरे-धीरे से मेरी ज़िंदगी में आना’। इन्हें सुनते ही हम एक नॉस्टेल्जिया में चले जाते हैं। इन गीतों से घर-घर में पहचाने जाने वाली अभिनेत्री अनु अग्रवाल की याद आयी कभी आपको? आइये हम आपको बताते हैं कि 90 के दशक में अपनी पहली ही फ़िल्म से फेमस होने वाली अनु आखिर आज क्या कर रहीं हैं। इस तस्वीर में देखिये कि आखिर वो आज दिखती कैसी हैं उसके बाद नीचे विस्तार से पढ़िए उनके दर्दनाक सफर के बारे में!

11 जनवरी 1969 को दिल्ली में पैदा हुई अनु अग्रवाल उस समय दिल्ली यूनिवर्सिटी से सोशलसाइंस की पढ़ाई कर रही थीं, जब महेश भट्ट ने उन्हें अपनी आने वाली म्यूजिकल फ़िल्म ‘आशिकी’ में पहला ब्रेक दिया। यह फ़िल्म ज़बरदस्त कामयाब रही और महज 21 वर्ष की उम्र में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने वाली अनु ने अपनी मासूमियत, संजीदगी और बहेतरीन अभिनय से लोगों को अपना मुरीद बना लिया। हालांकि, बाद में उनकी ‘गजब तमाशा’, ‘खलनायिका’, ‘किंग अंकल’, ‘कन्यादान’ और ‘रिटर्न टू ज्वेल थीफ़’ जैसी फ़िल्में कब पर्दे पर आईं और चली गईं, पता ही नहीं चला। इस बीच उन्होंने एक तमिल फ़िल्म ‘थिरुदा-थिरुदा’ में भी काम किया। यहां तक अनु ने एक शॉर्ट फ़िल्म ‘द क्लाऊड डोर’ भी की लेकिन, कुछ भी उनके फेवर में नहीं रहा! अब जैसे नेचर ने अनु को इशारा कर दिया था कि वो फ़िल्मों के लिए नहीं बनी है और शायद इसलिए 1996 के बाद अनु बड़े पर्दे से गायब हो गईं और उन्होंने अपना रुख योग और अध्यात्म की तरफ़ कर लिया।

लेकिन, अनु की लाइफ में तूफ़ान तो तब आया जब वो 1999 में एक भयंकर सड़क दुघटर्ना की शिकार हो गयीं। इस हादसे ने न सिर्फ़ उनकी मेमोरी प्रभावित किया, बल्कि उन्हें चलने-फिरने में भी अक्षम (पैरालाइज़्ड) कर दिया। 29 दिनों तक कोमा में रहने के बाद जब अनु होश में आईं, तो वह खुद को पूरी तरह से भूल चुकी थी। आसान शब्दों में कहा जाए तो वो अपनी याद्दशात खो चुकी थीं। अनु ने मौके की नज़ाकत को समझा और जीवटता दिखाते हुए डॉक्टर्स के निर्देशों को माना। बताते हैं कि लगभग 3 वर्ष चले लंबे उपचार के बाद वे अपनी धुंधली यादों को जानने में सफ़ल हो पाईं। जब वो धीरे-धीरे सामान्य हुई तो उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया और उन्होंने अपनी सारी संपत्ति त्याग कर सन्यास की राह चुन ली।

पिछले साल अनु अपनी आत्‍मकथा ‘अनयूजवल: मेमोइर ऑफ़ ए गर्ल हू केम बैक फ्रॉम डेड’ को लेकर फिर से चर्चा में रहीं। यह आत्मकथा उस लड़की की कहानी है जिसकी ज़िंदगी कई टुकड़ों में बंट गई थी और बाद में उसने खुद ही उन टुकड़ों को एक कहानी की तरह जोड़ा है। आज अनु पूरी तरह से ठीक हैं, लेकिन बॉलीवुड से इस खूबसूरत अभिनेत्री ने अपना नाता अब पूरी तरह से तोड़ लिया है। अब वह बिहार के मुंगेर जिले में अकेले रहती हैं और लोगों को योग सिखाती हैं।

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