अंकारा, एजेंसी।तुर्की में कार्यकारी राष्ट्रपति प्रणाली लाए जाने को लेकर कराए गए जनमत संग्रह में राष्ट्रपति तैयप एदोर्गन विजयी घोषित हुये हैं जबकि विपक्षी पार्टियों ने जनमत संग्रह के परिणाम को चुनौती देने का फैसला किया है।

इस्तांबुल में अपने अधिकारिक आवास में एदोर्गन ने कहा कि जनमत संग्रह में जीत के बाद सरकार में सैन्य हस्पक्षेप के तुर्की के लंबे इतिहास का रास्ता हमेशा के लिये बंद हो गया है। उन्होंने कहा कि हमें 2.5 करोड़ वोट मिले जो कि’ना’खेमे से 13 लाख वोट ज्यादा है।

उन्होंने कहा, ‘अपने इतिहास में पहली बार तुर्की ने इस तरह के एक महत्वपूर्ण बदलाव पर संसद और लोगों की इच्छा का निर्णय लिया है। तुर्की गणराज्य के इतिहास में पहली बार हम नागरिक शासन के माध्यम से हमारे सत्तारूढ़ प्रणाली को बदल रहे हैं। यही कारण है कि यह बहुत महत्वपूर्ण जनमत संग्रह है।

वहीं मुख्य विपक्षी रिपब्लिकन पीपल्स पार्टी (सीएचपी) के प्रमुख केमाल किलिकडारोग्लू ने कहा कि जनमत संग्रह की वैधता संदिग्ध है और जिन लोगों ने’हां’वोट का समर्थन किया है ऐसा हो सकता है कि उन्होंने कानून की सीमाओं से परे जाकर जनमत संग्रह का समर्थन किया हो।
उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी को जब यह पता चला था कि बिना मोहर लगे मतपत्रों की गिनती हो रही है तो हमने पहले ही 60 प्रतिशत वोटों दोबारा गिनती की मांग की थी। इस परिणाम के बाद निरंकुशता को बढ़ावा मिलेगा।
बता दें कि जनमत संग्रह में जीत हासिल करने के बाद एदोर्गन अब नये नियमों के तहत अधिकतम 2029 तक राष्ट्रपति बने रह सकते हैं।

एदोर्गन बोले- नतीजों का करें सम्मान
जीत के बाद तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एदोर्गन ने कहा कि विपक्षी पार्टियों समेत सभी को जनमत संग्रह के नतीजों का सम्मान करना चाहिये। उन्होंने कहा कि तुर्की के लोगों ने’हां’ के पक्ष में वोट किया है जिसका मतलब है लोग देश में कार्यकारी राष्ट्रपति संबंधी संवैधानिक बदलावों को लागू करना चाहते हैं।
समर्थकों का मानना है कि जनमत संग्रह में जीत के बाद देश आधुनिकीकरण की दिशा में बढ़ेगा वहीं विपक्षी पार्टियां जनमत संग्रह के मतों की वैधता को चुनौती दे रहें हैं। विरोधियों का मानना है कि देश में इससे निरंकुशता को बढ़ावा मिल सकता है।

उल्लेखनीय है कि जनमत संग्रह में जीत के बाद राष्ट्रपति की शक्तियां काफी बढ़ जाएंगी। राष्ट्रपति के पास कैबिनेट मंत्रियों को नियुक्त करने,वरिष्ठ न्यायाधीशों को चुनने और संसद को भंग करने का अधिकार होगा। नई प्रणाली के तहत प्रधानमंत्री के पद को समाप्त कर दिया जाएगा और सारी शक्तियां राष्ट्रपति के हाथों में दे दी जाएंगीं।

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