नई दिल्ली। 11वें सिविल सेवा दिवस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रशासनिक अधिकारियों को समय के साथ बदलने को कहा। उन्होंने कहा कि अब हमारी जिम्मेदारी बढ़ गई है। 15-20 साल में प्रतिस्पर्धा का दौर बढ़ा है। हमें जल्द अब अपनी कार्यशैली बदलनी पड़ेगी। लोगों के पास अब विकल्प मौजूद हैं। सरकार के रहते लोगों को बोझ महसूस नहीं होना चाहिए। चुनौती को अवसर में बदलना होगा। इस प्रतिस्पर्धा के दौर में सर्वोत्तम लोगों से सर्वोत्तम काम की उम्मीद है।
पीएम मोदी ने कहा कि सबसे मेधावी छात्र अाईएएस बनते हैं, काम भी उसी हिसाब से होना चाहिए। अब लोग निजी अस्पतालों की तुलना सरकारी अस्पतालों से करते हैं। अगर काम करने के तरीके को बदलेंगे तो चुनौती भी अवसर में बदल जाएगी। यह प्रतियोगिता का दौर है इसलिए चुनौती भी ज्यादा बड़ी है। समर्पण भाव से काम करना चाहिए, नाम कमाने की इच्छा न होना ही सबसे बड़ी ताकत है। अच्छे काम के लिए टीम वर्क जरूरी है। ताकत का सही इस्तेमाल पता होना चाहिए।
उन्होंने कहा ”मैं चाहता हूं कि अगले एक साल में काम की क्वालिटी में बदलाव हो, सिर्फ सर्वश्रेष्ठ होने से काम नहीं चलता है। अगर सर्वश्रेष्ठ होने का ठप्पा आप पर लगा है तो उसे आदत बनाना जरुरी है। अफसरों को गृहणियों से काफी कुछ सीखने की जरुरत है, वह किस तरह परेशानियों के बावजूद सभी चीजों को मैनेज करती हैं। गृहिणी परिवार को नई ऊंचाई पर ले जाती है, वही जिम्मेदारी आपकी भी है। वरीयता क्रम का बोझ अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा है, हमें अपने अनुभव को बोझ नहीं बनने देना चाहिए।’

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