नई दिल्ली [जेएनएन]। आम आदमी पार्टी में चल रही खींचतान और पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा के गंभीर आरोपों को लेकर दैनिक जागरण के वरिष्ठ संवाददाता अभिनव उपाध्याय ने ‘आप’ के संस्थापक सदस्य रहे और अब स्वराज इंडिया पार्टी के प्रमुख योगेंद्र यादव से खास बात की। प्रस्तुत है इस बातचीत के प्रमुख अंश।
-क्या अरविंद केजरीवाल पर भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया जा सकता है?
-अरविंद केजरीवाल पर कोई रिश्वत लेने या भ्रष्टाचार का आरोप लगाता है तो मैं कहूंगा कि उसके लिए प्रमाण की जरूरत है। कपिल मिश्रा ने दो करोड़ की रिश्वत समेत कुछ आरोपों में कोई प्रमाण नहीं दिया है, लेकिन पीडब्ल्यूडी घोटाले वाला आरोप गंभीर है और सही भी है क्योंकि दस्तावेज मैंने अपनी आंख से देखे हैं। किसी गिरोह में जब झगड़ा होता है तो कई सच सामने आते हैं, और ये सच झूठ नहीं होते।
– चंदे में गड़बड़ी के आरोप तो काफी पहले के हैं, उन्हें कैसे देखते हैं?
-फरवरी 2015 के चुनाव के चार दिन पहले चार कंपनियों द्वारा आम आदमी पार्टी को 50-50 लाख रुपये चंदा देने की बात सामने आई थी। हमने उसकी जांच की मांग की थी, लेकिन कोई कुछ नहीं बोला और हमें बाहर कर दिया गया। ऐसा तब हुआ, जबकि यह पार्टी का नियम था कि दस लाख से अधिक राशि के चंदे की जांच की जाए और उसे पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की मंजूरी के बाद ही स्वीकार किया जाए। इसका जवाब मिलना चाहिए। आरोपों के जवाब में ये कहना कि दूसरों पर भी गंभीर आरोप हैं, उचित नहीं है।
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– केजरीवाल इन आरोपों को तवज्जो देते क्यों नजर नहीं आते?
-जब दो करोड़ रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया और केजरीवाल चुप थे, तब मुझे उनसे सहानुभूति थी, क्योंकि आरोप कोई किसी पर भी लगा सकता है। लेकिन जब बाद में उनके पारिवारिक लोगों पर आरोप लगे तो मुझे लगा मुख्यमंत्री विधानसभा में इस पर जवाब देंगे। लेकिन वहां ईवीएम का ड्रामा निहायत गैर जिम्मेदाराना और जनता की आंख में धूल झोंकने वाली हरकत थी। केजरीवाल अगर जवाब नहीं देते हैं तो इसका आशय है कि दाल में कुछ काला है।
– क्या आम आदमी पार्टी अपने शुरुआती चरित्र को कायम रखने में विफल रही है?
-आम आदमी पार्टी में आज भी हजारों ईमानदार कार्यकर्ता हैं, जो झूठी उम्मीद में फंसे हुए हैं। यह पार्टी नैतिकता, नीति और चुनावी राजनीति में दम-खम के साथ आने के लिए जानी जाती थी, लेकिन समय के साथ सब जाता रहा। जिसे नई संभावना कहा जाता था, अब वह एक खोखले डिब्बे जैसी है। आज की तारीख में प्रश्न यही है कि भाजपा इस पार्टी की हत्या करेगी या उससे पहले ही इसका नेतृत्व ऐसे कदम उठाएगा कि यह पार्टी आत्महत्या कर लेगी। हमारा सिद्धांत का संघर्ष था। आज सत्ता संघर्ष है, इसमें सिद्धांत कहां है।
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– ऐसी परिस्थिति में अरविंद केजरीवाल को क्या करना चाहिए?
-दिल्ली नगर निगम चुनाव से पहले मैंने अरविंद केजरीवाल से चुनाव हारने की स्थिति में इस्तीफा देने की मांग की थी। अभी जो आरोप लग रहे हैं, उनका उन्हें जवाब देना चाहिए। यह पार्टी डूबेगी तो उसका डूबना उम्मीदों का डूबना होगा, जिसकी छीटें हमारे ऊपर भी पडे़ंगी।
– आप केजरीवाल और कपिल मिश्रा दोनों में से किसे सही मानते हैं?
-पार्टी में शुद्ध सत्ता संघर्ष चल रहा है। जहाज डूब रहा है। ऐसे में जहाज का कौन सा टुकड़ा कौन हासिल कर ले, उसके लिए संघर्ष हो रहा है। इसमें कहीं सिद्धांत नहीं है और उसे छिपाने के लिए नैतिकता का लबादा पहनाने की कोशिश हो रही है, इसलिए इन दोनों पक्षों में से किसी एक के साथ खड़े होने को मैं सही नहीं मानता।
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