रोहतक । वैश्य एजुकेशन सोसायटी के 2 जुलाई को होने वाले त्रैवार्षिक चुनाव को लेकर पूरे हरियाणा दिल्ली व उत्तर प्रदेश से वैश्य एजुकेशन सोसायटी के आजीवन सदस्यों का एक महाकुंभ मेला जिसमें विभिन्न मण्डियों एवं दूर-दराज के इलाकों से जिनमें दिल्ली, गाजियाबाद, नोयडा और हरियाणा प्रांत के सभी जिलो से मतदान के लिए पहुॅचने वाले समाज के लोगो के लिए जिस मैत्री भोज का आयोजन वैश्य एजुकेशन सोसायटी के द्वारा निर्धारित किया गया था वह आज राजेन्द्र बंसल की अगुवाई में विनय जैन, लोकेश जैन और संजय भालोठिया ने नव-नियुक्त निर्वाचन अधिकारी व स्टेट अधिकारी अमित गुलिया के सेक्टर 3 स्थित हुड्डा कार्यालय उपस्थित होकर सोसायटी द्वारा दिये जाने वाले मैत्री भोज व्यवस्था को रद्द करने की मांग की और इसे सोसायटी का अनावश्यक खर्च बताया। नव-नियुक्त निर्वाचन अधिकारी अमित गुलिया ने उनकी मांग को स्वीकार करते हुए सोसायटी मैत्री भोज को रद्द कर दिया जिसकी पूरे अग्रवाल समाज के अन्दर कड़ी निंदा की जा रही है और समाज के अग्रणी नेता एवं समाजेसवी मनमोहन गोयल, सतीश बाबु गोयल, दीपक गोयल, पवन खरकिया, अनिल आर्य, विजय गुप्ता बाबा ने एक संयुक्त बैठक कर निर्णय लिया है कि 2 जुलाई को बाहर से आने वाले अग्रवाल समाज के आजीवन सदस्यों के लिए रोहतक का समस्त अग्रवाल समाज उस दिन जलपान एवं मैत्रीभोज की व्यवस्था करेगा और आने वाले किसी भी अग्रवाल बन्धु को किसी प्रकार की कठिनाई नही होने दी जाएगी।
चारो पदाधिकारियों ने निर्वाचन अधिकारी से सतीश बाबू गोयल और दीपक गोयल की सदस्यता बहाली को लेकर सवाल उठाये और उसे पुनः रद्द करने की मांग की जिस पर निर्वाचन अधिकारी को स्टेट रजिस्टार ऑफ सोसायटी चण्डीगढ़, रजिस्टार सोसायटीज रोहतक द्वारा दिये गये निर्णय की कापी दिखाई गई जिस पर पूर्व निर्वाचन अधिकारी विजय गुप्ता को सही ठहराते हुए उसे वैध करार दिया और उनकी मांग को खारिज कर दिया।
महासचिव विजय गुप्ता ने बताया कि प्रधान राजेन्द्र ने पर्दे के पीछे से एक याचिका सोसायटी के आजीवन सदस्य मनीश जो भिवानी में रहते है के माध्यम से माननीय सिविल कोर्ट रोहतक योगेश चौधरी की कोर्ट में दाखिल करवा दिया था। याचिकाकर्ता ने इस याचिका में चुनाव पर रोक लगाने व निर्वाचन अधिकारी की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगाकर उन्हें हटाने की याचिका दाखिल की हुई थी जिसे माननीय कोर्ट ने आज खारिज कर दिया। ज्ञात रहे कि याचिकाकर्ता मनीश प्रधान राजेन्द्र बंसल का दूर का रिश्तेदार है।
पूर्व निर्वाचन अधिकारी विजय गुप्ता ने नव-नियुक्त निर्वाचन अधिकारी अमित गुलिया को आज औपचारिक रूप से निर्वाचन कार्यालय वैश्य एजुकेशन सोसायटी में अपने कार्यभार को उन्हें सौंपते हुए सारे दस्तावेज सुपुर्द किये एवं बैंक खातों को सुपुर्द किया। इस अवसर पर विजय गुप्ता ने कहा कि उन्होंने समाजहित और सोसायटी हित में अपने पद से त्यागपत्र इस लिए दिया कि ताकि उन पर विरोधी पक्ष द्वारा आये दिन उठाये जाने वाली उंगलियों को विराम लग सके और चुनाव में पूरी पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी प्रकार की बाधा न आये और संस्था पर प्रशासक की नियुक्ति न हो। उन्होंने विनय आर्य आज दैनिक समाचार पत्रों में विनय आर्य द्वारा 15 जून को नामाकंन न होने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जिस बी0एड0 कालेज का वह जिकर कर रहे है उस स्थान पर सुचना हेतु पहले से ही नामाकंन भरने के लिए स्थान बदलने का नोटिस एवं फलैक्स लगाई गई है और 15 जून को ही उनके भाई अरूण आर्य और चचेरे भाई अनिल आर्य और सुधीर आर्य ने भी अपने नामाकंन पत्र दाखिल किये है और 15 जून को लिये गये नामाकंन पत्र बैंक डाफट के माध्यम से लिये गये है और उन्हें अगले दिन बैंक खातों में जमा करवाया गया। सोसायटी द्वारा काटी गई नकद की रसीदे केवल 9 से 10 बजे तक के समय में काटी गई है क्योंकि बैंक कर्मचारी 10 बजे अपनी डयूटी पर आये थे। विनय आर्य द्वारा यह बयान देना कि मैं 16 व 17 जून को शहर से बाहर था सच्चाई से परे है क्योंकि 16 व 17 जून को वह वैश्य पब्लिक स्कूल के प्रांगण में घूमते हुए देखे गये जोकि स्कूल के कैमरे में कैद है। यह केवल प्रधान राजेन्द्र बंसल के इशारे पर मुझे बदनाम करने की साजिश है।
विजय गुप्ता ने राजेन्द्र बंसल पर जिन्होंने सरकारी अधिकारी को निर्वाचन अधिकारी लगाने की मांग को भी समाज विरोधी बताते हुए कहा कि जब रजिस्टार सोसायटी रोहतक ने उन्हें गवर्निंगबाडी की बैठक बुलाकर समाज के किसी व्यक्ति को निर्वाचन अधिकारी का नाम दिये जाने का निवेदन किया जिस पर राजेन्द्र बंसल ने गवर्निंगबाडी की बैठक बुलाने में असमर्थता जाहिर करते हुए सरकारी अधिकारी नियुक्त करने की मांग की थी। गुप्ता ने कहा कि क्या आज 16000 आजीवन सदस्यों में एक भी ऐसा व्यक्ति राजेन्द्र बंसल की नजरों में निर्वाचन अधिकारी बनने के लायक नही है यह पूरे समाज के उपर राजेन्द्र बंसल का गहरा तमाचा और समाज का अपमान है। उनकी लड़ाई मुझसे तो हो सकती है पूरे समाज से कैसे हुई यह समझ से परे है और उनकी हताशा और निराशा तथा बौखालाहट का परिणाम है।

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