भारत और चीन एक बार फिर एक दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं। दोनों देशों की सेनाओं के रिश्तों में जिस तरह से तल्खी बढ़ी है उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि पिछले कई सालों के बाद भारत चीन से टकराव की स्थिति में है।
लेकिन अब सवाल है कि इस टकराव की असली वजह क्या है? और सिक्किम इलाके में भारतीय सीमा पर चीन ने दादागिरी कैसे शुरू की?
खबरों के अनुसार, सिक्किम के डोका ला इलाके में चीन और भारतीय फौज के करीब 200 जवान महज मांच मीटर की दूरी पर ही आमने सामने खड़े रहते हैं। इस इलाके में जून को जब से चीनी सेना (चाइनीज पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ‘PLA’) ने भारतीय सेना के दो बंकरों को तोड़ डाला। हालांकि यहां अभी किसी प्रकार की हिंसा की खबर नहीं आई।
बताया जा रहा है कि 18-19 मई को चीनी सेना के कुछ जवान भारतीय सीमा पर आए और भारतीय सेना की ओर से बनाए गए दो बंकरों को विरोध किया। सूत्रों के हवालों से कहा कि गया कि इन बंकरों में सैनिकों को तैनात नहीं किया गया था लेकिन इनके जरिए चीन सीमा पर आसानी से नजर रखा जा सकता था।
8 जून को चीनी जवानों भारतीय सीमा पर डम्पर और बुलडोजर के साथ आए और हमारी सीमा पर बने एक बैंकर को गिरा दिया। इसके बाद सेना ने चीन इस रवैये का विरोध किया। इसी क्रम में दोनों सेनाओं के बीच विवाद शुरू हो गया।
भारत चीन विवाद बंकर तोड़ने ज्यादा गहराया जरूर है लेकिन इसकी असली वजह है चुंबी घाटी। यहां पिछले कुछ समय से चीन लगातार अपनी सक्रियता बढ़ा रहा है। यह इलाका भारत भूटान और तिब्बत को जोड़ने वाले इलाके में स्थिति है। यह इलाका भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बहुत संवेदनशील है। क्योंकि यहां पर चीन सड़क निर्माण कार्य भी तेजी से कर रहा है।
भारत और चीन के बीच के 2 अहम दर्रे, नाथू-ला और जेलप-ला इस घाटी पर खुलते हैं। इस संकरी घाटी में सैन्य गतिविधियां बहुत मुश्किल हैं। सिलीगुड़ी गलियारे से यह जगह करीब 50 किलोमीटर दूर है। कुछ जगहों पर तो यह गलियारा केवल 17 किलोमीटर चौड़ा है। माना जा रहा है कि संकरे आकार का होने के कारण ही इस इलाके को चिकन्स नेक नाम दिया गया है। चुंबी घाटी के ठीक नीचे स्थिति सिलीगुड़ी गलियारा भारत को इसके उत्तरी पूर्वी राज्यों से जोड़ता है। यही कारण कि भारतीय सेना ने यहां चीन के सड़क निर्माण का विरोध जताया है।

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