17 जुलाई को देश में राष्ट्रपति चुनाव होने वाला है जिसका परिणाम 28 जुलाई को जारी कर दिया जाएगा। दो मुख्य उम्मीदवारों मीरा कुमार और राम नाथ कोविंद को छोड़ अन्य 93 उम्मीदवारों ने भी राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन भरा था लेकिन उनके नामांकन रद्द कर दिए गए।
नामांकन दाखिल करने वालों में से एक शख्स जहां खुद को भगवान बता रहा था वहीं दूसरे ने अल्बर्ट आइंस्टीन, मार्टिन लुथर किंग और अब्राहम लिंकन को अपना प्रस्तावक बताया था। संसद भवन के नोटिस बोर्ड पर इन उम्मीदवारों का नाम नामांकन रद्द की लिस्ट में देखा जा सकता है। राष्ट्रपति चुनाव के लिए 28 जून की आखिरी तारीख तय थी तथा नामांकन वापिस लेने की आखिरी तारीख 01 जुलाई है।

एक अंग्रेजी अखबार ‘आईई’ में छपी खबर के मुताबिक पानीपत के देवीदयाल अग्रवाल ने खुद को ईश्वर बताते हुए कहा था कि अपने नामांकन के लिए उन्हें सांसदों और विधायकों की प्रस्तावक के रूप मे कोई जरूरत नहीं है। अपने नांमांकन पत्र में अग्रवाल ने लिखा था कि, “मैं ईश्वर हो चुका हूं और सर्वोच्च शक्तिमान हूं, रामनाथ कोविंद और मीरा कुमार को राष्ट्रपति नहीं बनना चाहिए। क्या उनके पास चमत्कारी शक्तियां हैं?” अपने नामांकन पत्र में अग्रवाल ने करीब 24 बार ये लिखा था कि, “मैं भगवान हूं”।
इसके अलावे धमकी देते हुए उन्होंने लिखा था कि, “अगर मेरी अर्जी नहीं मानी जाएगी तो दिल्ली में भयानक भूकंप आएगा। मुझे ही राष्ट्रपति बनना चाहिए। मैं दुनिया का सबसे बड़ा वैज्ञानिक हूं।”
जब अग्रवाल का नामांकन रद्द हुआ तो वो संसद भवन के एक अधिकारी पर बिफर पड़े, “मैं श्राप देता हूं, अनर्थ होगा।”
हरियाणा के ही जिंद के रहने वाले विनोद कुमार ने अपने नामांकन पत्र में विवेकानंद, भगत सिंह, नेल्शन मंडेला, बीआर अम्बेडकर, सुभाषचंद्र बोस, जेएफ केनेडी, रोनाल्ड रिगन और लेनिन के अलावे मार्टिन लुथर, लिंकन और आइंस्टीन को अपना प्रस्तावक बताया था। एक अन्य ने अमिताभ बच्चन,
टाटा, बिरला और लता मंगेशकर को अपना प्रस्तावक बताया था।
खबरों के मुताबिक 95 उम्मीदवारों ने तकरीबन 108 नोमिनेशन फाइल किए थे, जिनमें से 4-4 रामनाथ कोविंद और मीरा कुमार ने दाखिल किया था। इस तरह से कई अलग-अलग वजहों से बाकी 93 उम्मीदवारों के नामांकन रद्द कर दिए गए।
लोकसभा के एक सूत्र के हवाले से खबर में ये भी बताया गया है कि, “लोगों के नामांकन पत्र में कई तरह की गलतियां थीं। किसी ने प्रस्तावकों के नाम के साथ उनकी फेक साइन कॉपी सबमिट कर दी थी तो कुध ने अपने गांव के लोगों के नाम प्रस्तावकों की लिस्ट में भर कर जमा किया था। लेकिन इसके बावजूद भी लोग अपनी उम्मीदवारी को लेकर काफी सीरियस थे। जिन उम्मीदवारों के नामांकन रद्द किए गए थे, उनमें से कईयों ने लोकसभा महासचिव के दफ्तर आ कर ये जानने की कोशिश भी की कि आखिर उनके फॉर्म के साथ क्या हुआ।”

नामांकन दाखिल करने वालों में 37 साल की उम्र से लेकर 78 साल तक के उम्मीदवारों के नाम थे।
गौरतलब है कि 1977 में 50 एमपी और 50 एमएलए का नाम प्रस्तावक और सेकेंडर के रूप में डालने का प्रावघान आया था। 1969 के चुनाव में कुल 15 उम्मीदवार थे जिनमें से एक थे वीवी गिरी जिन्होंने वो चुनाव जीता था और दूसरे नीलम संजीव रेड्डी जो 1982 में राष्ट्रपति बने थे। 1977 के बाद ऐसे बहुत कम ही मौके आए हैं जब राष्ट्रपति चुनाव में 2 से अधिक उम्मीदवार रहे होंगे। 1992 के राष्ट्रपति चुनाव में शंकर दयाल शर्मा के जो कि राष्ट्रपति चुन लिए गए थे, इनके अलावे जीजी स्वेल, राम जेठमलानी और काका जोगिंदर सिंह धरतीपकड़ थे।

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