नोएडा। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने देश के 11 लाख से ज्यादा शिक्षकों को प्रशिक्षित करने का जिम्मा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआइओएस) को सौंपा है। ये शिक्षक अभी विभिन्न राज्यों के सरकारी और निजी स्कूलों में बिना प्रशिक्षण के पढ़ा रहे हैं। अब सरकार ने शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) में संशोधन कर इन्हें अनिवार्य रूप से प्रशिक्षण के लिए आखिरी मौका दिया है। मार्च 2019 तक प्रशिक्षण पूरा न करने वाले शिक्षकों को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।

पाठ्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि अप्रशिक्षित शिक्षकों को डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) का प्रशिक्षण दिया जाएगा। दो वर्षीय कोर्स का पहला सेमेस्टर तीन अक्टूबर से शुरू हो जाएगा। इससे पहले राज्य सरकारों को अपने यहां के अप्रशिक्षित शिक्षकों का पंजीकरण एनआइओएस में कराना होगा। एनआइओएस के अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए एमएचआरडी के स्वयं के प्लेटफॉर्म की मदद ली जाएगी।

इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर टेक्स्ट और ऑडियो- विजुअल पाठ्य सामग्री तो उपलब्ध होगी ही, शिक्षकों का लेक्चर और उनसे बातचीत का लिंक भी होगा। इसके अलावा स्वयंप्रभा प्लेटफॉर्म पर एनआइओएस के चैनल पर 24 घंटे विभिन्न विषयों के लेक्चर भी प्रसारित किए जाएंगे। अभ्यर्थियों को इसके माध्यम से पढ़ाई करनी होगी। हालांकि, प्रत्येक सेमेस्टर की परीक्षाएं ऑफलाइन होंगी।

प्रमुख राज्यों की स्थिति

राज्य अप्रशिक्षित शिक्षक

उत्तर प्रदेश 143817
बिहार 131665
मध्य प्रदेश 121455
पश्चिम बंगाल 295670
असम 81653
झारखंड 27352
हरियाणा 4960
पंजाब 9102
(नोट : इसमें सरकारी और प्राइवेट, दोनों तरह के स्कूलों के अप्रशिक्षित शिक्षक हैं)

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों के अप्रशिक्षित शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की अहम जिम्मेदारी हमें दी है। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है।- प्रो. सीबी शर्मा, चेयरमैन, एनआइओएस

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