नई दिल्ली
चीन ने एक बार फिर पठानकोट हमले के मास्टर माइंड आतंकी मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी मानने से इनकार कर दिया है। चीन ने चालबाजी दिखाते हुए संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर अपने वीटो का अधिकार किया है। चीन ने इसबार मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर 3 महीने के लिए तकनीकी रोक लगा दी है। संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के लिए अमेरिका की ओर से प्रस्ताव लाया गया था।
अब 2 नवंबर तक रोक
चीन द्वारा मसूद अजहर को आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर तकनीकी बाधा की आखिरी तारीख 2 अगस्त थी। अगर चीन इस तारीख के बाद फिर से बाधित करने का फैसला नहीं लेता तो मसूद अजहर संयुक्त राष्ट्र की तरफ से औपचारिक तौर पर आतंकी घोषित किया जा सकता था। मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक डेडलाइन खत्म होने के ठीक पहले चीन ने फिर एक बार फिर प्रस्ताव पर 3 महीने के लिए तकनीकी बाधा पैदा कर दी है। अब रोक की तारीख 2 नवंबर तक की है।
चीन का तर्क
चीन यह कहकर भारत के कदम का विरोध कर रहा है कि यूएनएससी 1267 में कोई सहमति नहीं है। यूएनएससी 1267 आतंकवादी संगठनों और उनके नेताओं पर वैश्विक प्रतिबंध लगाती है। जेईएम पहले ही प्रतिबंधित सूची में है। भारत ने पिछले साल मार्च में संयुक्त राष्ट्र में अजहर पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा था। भारत ने उसे पठानकोट आतंकवादी हमले का मास्टरमाइंड बताया।
पठानकोट आतंकी हमला:मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने में चीन बन रहा रोड़ा

बढ़ सकते हैं भारत चीन के तनाव
पठाकोट हमले के मास्टरमाइंड का पक्ष लेने पर चीन के साथ भारत के तनाव की स्थिति और गहरा सकती है। अभी डोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं भी आमने सामने हैं और राजनयिक तौर पर भी तनाव बरकरार है। उधर तोकलाम पर चीन ने दावा कि है कि भारत ने डोकलाम से अपनी सेना को कम कर लिया है, जबकि भारत ने इस बात से इनकार किया है।
इससे पहले चीन ने बुधवार को कहा था कि पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना, मसूद अजहर को यूएन टेररिस्ट घोषित कराने के अमेरिकी प्रस्ताव पर फैसले के लिए कुछ वक्त चाहिए।
बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य होने के कारण चीन के पास वीटो पावर है। चीन ने इससे पहले भी कई बार जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रयासों को बाधित किया। पिछले साल मार्च में 15 देशों में सिर्फ चीन ही अकेला देश था जिसने जैश के सरगना को वैश्विक आतंकी घोषित करने के भारत के प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया था। समिति के सभी 14 देशों ने भारत के प्रस्ताव का समर्थन किया था।
चीन संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को आतंकी घोषित करने पर अभी फैसला लेने को तैयार नहीं है। इस संबंध में लंबित अर्जी पर चीन के विदेश मंत्रालय का कहना है कि समय आने पर फैसला लिया जाएगा। इस साल की शुरुआत में चीन ने इस अर्जी पर तकनीकी रूप से छह महीने के लिए रोक लगाई थी। इसकी जल्द ही समीक्षा होने की उम्मीद है। मंत्रालय ने पहले एक लिखित जवाब में कहा था, ‘हमने कई बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 समिति को चीन के रुख से अवगत कराया है।’
चीन यह कहकर भारत के कदम का विरोध कर रहा है कि यूएनएससी 1267 में कोई सहमति नहीं है। यूएनएससी 1267 आतंकवादी संगठनों और उनके नेताओं पर वैश्विक प्रतिबंध लगाती है। जेईएम पहले ही प्रतिबंधित सूची में है। भारत ने पिछले साल मार्च में संयुक्त राष्ट्र में अजहर पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा था। भारत ने उसे पठानकोट आतंकवादी हमले का मास्टरमाइंड बताया।
आपको बता दें कि इसी साल फरवरी में चीन ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के अमेरिका के प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र में बाधित किया था।

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