आजमगढ़। समाजवादी पार्टी के सरंक्षक मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में पार्टी के कुछ उत्साही कार्यकर्ताओं ने इतनी बड़ी गलती करा दी कि जिससे पार्टी की किरकिरी हो रही है। एक गंभीर चूक ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मौजूदगी में कार्यक्रम पर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं।

शहीदों के परिजनों को सम्मानित करने के लिए आयोजित कार्यक्रम में अमर शहीद वीर अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीबी को आमंत्रित न करने के बाद भी उनके नाम की विधिवत घोषणा की गई। इतना ही नहीं, किसी दूसरी बुजुर्ग महिला को रसूलन बीबी के नाम पर सम्मानित भी कर दिया गया। रसूलन बीबी के नाती जमील ने आमंत्रण मिलने से इन्कार करते हुए बताया कि उक्त कार्यक्रम में भाग लेने उनके यहां से कोई गया ही नहीं था। सगड़ी तहसील के नत्थूपुर गांव में शहीद रामसमुझ यादव की मूर्ति का अनावरण समारोह था।

इसमें भाग लेने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री व सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी पहुंचे थे। मंच पर कई शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया जाना था। इसी दौरान मंच पर जब 70 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला पहुंचीं तो उपस्थित लोगों को बताया गया कि अब आपके सामने रसूलन बीबी को सम्मानित करेंगे अखिलेश यादव। देर शाम और दूसरे दिन गुरुवार को इस चर्चा को पर लग गए कि रसूलन बीबी की जगह किसी दूसरे का सम्मान कर दिया गया है। गंभीर चूक की तह तक जाने के लिए जब पड़ताल की गई तब स्पष्ट हुआ कि रसूलन बीबी को बुलाया ही नहीं गया था।

बूढऩपुर के मदियापार निवासी भगवती सिंह की पत्नी ललिता सिंह भी रसूलन बीबी जैसी ही दिख रही थीं लिहाजा उन्हें ही रसूलन बीबी मानते हुए उनका सम्मान कर दिया गया। आजमगढ़ निवासी ललिता सिंह लगभग 70 वर्ष की हैं, जबकि गाजीपुर निवासी रसूलन बीबी लगभग 95 वर्ष की। शहीद रामसमुझ यादव के भाई प्रमोद यादव का कहना है कि उन्होंने रसूलन बीबी को न्योता भेजवाया था। बहरहाल, इस संपूर्ण प्रकरण के दूसरी वजहों से चर्चा में आने पर आयोजकों ने रसूलन बीबी से खेद जताया है।

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