देहरादून: आमतौर पर पितृपक्ष में लोग भूमि, वाहन, जेवर आदि की खरीदारी नहीं करते। मगर, शास्त्रों में कहीं ऐसा उल्लेख नहीं है कि पितृपक्ष में खरीदारी वर्जित है।

प्राचीन समय में लोग इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान में अधिक समय देने के कारण वस्तुएं नहीं खरीद पाते थे। यह परंपरा धीरे-धीरे रूढ़ियों में तब्दील हो गई, जबकि इन दिनों दिनों में शुभ कार्य सहित खरीदारी की जा सकती है, क्योंकि पितर हमेशा गणेश आराधना और देवी पूजा के बीच की अवधि में आते हैं।

सूक्ष्म शरीर में हमारे बीच उपस्थित पितर जब हमें खुश, समृद्ध और नई वस्तुएं खरीदते हुए देखते हैं तो आशीष ही देते हैं। हां, यह जरूर है कि पितृपक्ष में आपराधिक, अमानवीय और गलत कार्य से बचना चाहिए, लेकिन शुभ और पवित्र कार्यों से नहीं। हमें मन से यह भ्रम निकाल देना चाहिए कि पितृपक्ष का समय अशुभ है। बल्कि, यह दिन तो सामान्य दिनों से अधिक शुभ हैं, क्योंकि पितर हमारे साथ हैं।

पितृपक्ष में नया घर लेने में भी कोई बुराई नहीं है। बस इस समय में स्थान परिवर्तन नहीं करना चाहिए, क्योंकि मान्यता है कि जहां पितरों की मृत्यु हुई होती है, वो उसी स्थान पर लौटते हैं। आप पितरों के लिए श्राद्ध-तर्पण कर रहे हैं तो उन्हें आपके नए घर, नए वाहन, नए कपड़े आदि खरीदने से कोई परेशानी नहीं होती है। शास्त्रों में इस बात की कहीं मनाही नहीं है। उल्टे वे आपको आगे बढ़ते हुए देखकर खुश ही होते हैं। जाते-जाते भी तो वे सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य का आशीष देकर जाते हैं।

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