वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने चुनावी वादे के अनुसार ‘डेफर्ड एक्शन फॉर चिल्ड्रन अराइवल (डीएसीए)’ योजना को समाप्त करने की तैयारी में हैं। वह मंगलवार को इससे जुड़ी घोषणा कर सकते हैं। इस योजना को ‘ड्रीमर’ के नाम से भी जाना जाता है। डीएसीए को खत्म करने से भारतीय मूल के सात हजार अमेरिकी नागरिक भी प्रभावित होंगे।

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा बचपन में ही अवैध रूप से अमेरिका में दाखिल हुए बच्चों को प्रत्यर्पण से बचाने के लिए यह योजना लाए थे। अमेरिकी पत्रिका ‘पॉलिटिको’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप योजना को रद कर चुके हैं। वहीं, ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ का कहना है कि प्रवासी कार्यक्रम को खत्म करने से पहले राष्ट्रपति ने कांग्रेस (अमेरिकी संसद) को छह महीने का वक्त दिया है, ताकि इसको लेकर नए सिरे से नियम-कायदे तय किए जा सकें। डीएसीए के तहत तकरीबन आठ लाख लोगों को प्रत्यर्पण से सुरक्षा प्राप्त है।

प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष और सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ नेता पॉल रेयॉन ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘ट्रंप को डीएसीए को निरस्त नहीं करना चाहिए क्योंकि ये बच्चे अमेरिका छोड़ किसी और देश को नहीं जानते। मेरी समझ में वह ऐसा नहीं करेंगे। यह ऐसा मसला है जिसे कांग्रेस को तय करना चाहिए।’ डेमोक्रेटिक पार्टी की नैंसी पेलोसी ने ट्रंप की योजना की आलोचना करते हुए कहा कि देशभक्त और साहसी युवाओं को प्रत्यर्पित करना देश और अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी होगा।

अपने कर्मचारियों के समर्थन में टिम कुक

एप्पल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कुक ने डीएसीए पर ट्रंप के रुख की आलोचना की है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘एप्पल के हमारे 250 कर्मचारी ड्रीमर्स हैं। मैं उनके साथ हूं। वे समान सम्मान के हकदार हैं। इस समस्या का समाधान अमेरिकी मूल्यों के मुताबिक होना चाहिए।’ माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ भारतीय मूल के सत्या नडेला ने भी ट्रंप की योजना की आलोचना की है। एक आंकड़े के मुताबिक इस योजना को समाप्त करने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को 200 अरब डॉलर (तकरीबन 13 लाख करोड़ रुपये) का नुकसान होने की आशंका है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here