जबलपुर। नीट से मप्र कोटे की भरी जाने वाली सात सीटों का आंकड़ा चिकित्सा शिक्षा विभाग की गले की हड्डी बन गया है। व्हिसल ब्लोअर विनायक दिवाकर चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव गौरी सिंह को पत्र लिखकर इसकी जानकारी मांगी है। इसमें जीओआई की सुरक्षित 29 सीटों में से बची हुई सीट में 15 प्रतिशत सीटें एनआरआई कोटे से और 85 प्रतिशत सीटें स्टेट कोटे से भरी जाती हैं। इसके बाद करीब सात सीटें कम हो रही हैं।

इसे इस तरह समझें

मप्र में कुल सीट – 850

जीओआई कोटे की सीट – 29

शेष बची सीट – 821

शेष सीट का 15 प्रतिशत एनआरआई सीट कोटा – 123 सीट

शेष 85 प्रतिशत स्टेट कोटा – 698 सीट होनी चाहिए।

ये हैं स्टेट कोटे की सीट

स्टेट कोटे की सीट – 691 सीट हैं

एनआरआई कोटा – 130 सीट हैं

स्टेट कोटे में सीटें कम

स्टेट कोटे की सीटें 698 होनी चाहिए लेकिन बेवसाइड में 691 दिखा रही है इसमें 631 सीटें ओपन फॉर ऑल, 20 सीटें मिलिट्री पर्सन,20 सीटें स्वतंत्रता सैनानी और 20 सीटें विकलांग कोटे की हैं। इस तरह ये 60 सीट मिलाकर कुल 691 सीटें चिकित्सा शिक्षा विभाग की बेवसाईड में है। वहीं एनआरआई कोटे की सात सीट अधिक दर्ज हैं।

प्रमुख सचिव को पत्र लिखा

मप्र कोटे की सीटें कम होने के बारे में मैंने चिकित्सा शिक्षा सचिव गौरी सिंह को पत्र लिखा है। चिकित्सा शिक्षा विभाग को यह बताना चाहिए कि स्टेट कोटे की सीटें कैसे कम हुई। स्टेट कोटे की सीट 698 होनी चाहिए लेकिन बेवसाईड में 691 दिखा रही है, इसी तरह एनआरआई कोटे की सात सीटें अधिक दर्ज हैं। इससे स्टेट कोटे के छात्रों का नुकसान हो रहा है। चिकित्सा शिक्षा विभाग को इसकी जानकारी देनी चाहिए।

– विनायक परिहार व्हिसल ब्लोअर

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here