नई दिल्ली। जीएसटी लागू होने के बाद देश की आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती देखने को मिली थी। हालांकि देश में ग्रोथ की मजबूत संभावनाएं हैं। वैश्विक एजेंसी मॉर्गन स्टैनले का कुछ ऐसा ही मानना है। एजेंसी का कहना है कि जीएसटी के कारण आई दिक्कतों का प्रभाव कम होने के बाद देश की वृद्धि दर में तेजी देखने को मिलेगी। साथ ही उसने कहा कि वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर 6.7 फीसद रह सकती है। गौरतलब है कि देशभर में एक जुलाई 2017 को जीएसटी लागू कर दिया गया था।

वित्त वर्ष 2018 की पहली (अप्रैल से जून) तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर कम होकर तीन वर्ष के निम्नतम स्तर (5.7 फीसद) पर आ गई है। मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में सुस्ती के चलते जीएसटी व्यवस्था के लागू होने के बाद हुई असमंजस से वृद्धि दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में बताया गया है कि वो इसे कुल मांग में गिरावट के रूप में नहीं देख रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें लगता है कि देश में वृद्धि की संभावनाएं मजबूत हैं। हालांकि वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में जीडीपी में गिरावट के चलते मॉर्गन स्टेनली ने पूरे वर्ष की वृद्धि दर के अनुमान में कुछ समायोजन किया है। रिपोर्ट में कहा गया, हमें लगता है कि जून, 2017 की पहली तिमाही थोड़ी मुश्किल भरी रही है। मार्च, 2018 को समाप्त तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर 7.5 फीसद के करीब रह सकती है।

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