लखनऊ। मुंबई बम ब्लास्ट के दोषी माफिया अबु सलेम का राजधानी से गहरा कनेक्शन रहा है। 1993 में बम ब्लास्ट के बाद अबु भारत छोड़कर भाग निकला था। इसके लिए उसने लखनऊ कनेक्शन का इस्तेमाल किया था। विदेश भागने के लिए इस्तेमाल किया गया पासपोर्ट लखनऊ से बनवाया गया था।

खास बात यह है कि अबु को पासपोर्ट बनवाने के लिए राजधानी आने की जरूरत भी नहीं पड़ी थी। इस मामले में सीबीआइ ने हजरतगंज कोतवाली में एफआइआर दर्ज करवाई थी। इस मामले का खुलासा होने के बाद स्पेशल मजिस्ट्रेट सीबीआइ कोर्ट में अबु सलेम को कई बार कड़ी सुरक्षा के बीच पुष्पक एक्सप्रेस से लखनऊ लाया गया था।

अबु सलेम का राजधानी में नेटवर्क होने का खुलासा वर्ष 1993 में तब हुआ था जब उसने करीबियों के माध्यम से अपना पासपोर्ट बनवाया था। इस मामले में 40 लोगों पर आरोप तय हुए थे, जिनसे सीबीआइ ने कई बार लंबी पूछताछ की थी। सीबीआइ ने पासपोर्ट के लिए लगाए गए दस्तावेजों की पड़ताल भी की थी।

इसके बाद फर्जी पासपोर्ट बनवाने के आरोप में 12 दिसंबर 2007 को अबु के खिलाफ नोटिस जारी किया गया था। मुंबई जेल में बंद होने के कारण उसे महाराष्ट्र पुलिस कई बार कड़ी सुरक्षा में पुष्पक एक्सप्रेस से लखनऊ लाई और ले गई थी।

1999 में दर्ज हुआ था केस: पासपोर्ट मामले में राजधानी के हजरतगंज कोतवाली में सीबीआइ ने वर्ष 1999 में सलेम और उसकी पहली पत्नी समीरा जुमानी उर्फ नेहा आसिफ जाफरी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अबु ने 1993 में फर्जी नाम से पासपोर्ट बनवाया था। इसके लिए कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग किया गया था। सलेम ने अकील अहमद आजमी के नाम से पासपोर्ट बनवाया था और इसके लिए उसने बुलंदशहर का पता दिया था। वहीं समीरा का पासपोर्ट सबीना आजमी के नाम से बनाया गया था। इस मामले में परवेज आलम नाम के व्यक्ति को सीबीआइ ने गिरफ्तार किया था।

दिव्यांग बोगी पर रहता था कब्जा: अबु की सुरक्षा में बड़ी संख्या में पुलिस बल राजधानी आता था। इस दौरान ट्रेन की दिव्यांग बोगी पर उनका कब्जा रहता था। अबु को ट्रेन में उसका मनपंसद खाना भी मुहैया कराया जाता था। अबु की आवभगत को देखते हुए कई बार सवाल भी खड़े हुए थे।

ट्रेन में शादी का किया था दावा: अबु के मुंबई से राजधानी लखनऊ आने के दौरान उस वक्त खलबली मच गई थी, जब उसने सफर में ही मुंबई के मुंब्रा में रहने वाली एक युवती से निकाह का दावा किया था। अबु सलेम के लखनऊ पहुंचने पर प्लेटफार्म से लखनऊ जंक्शन के बाहर निकालने की जिम्मेदारी जीआरपी को सौंपी गई थी। उस वक्त जीआरपी में तैनात एक महिला अधिकारी पर वर्दी का मैनुअल न मानने का आरोप लगा था।

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