नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की सड़कों पर होने वाली हर पांच दुर्घटनाओं में एक मौत होती है। किसी भी दूसरे मेट्रो के मुकाबले यह सबसे ज्यादा है। सड़क मंत्रालय द्वारा जारी वर्ष 2016 की रोड एक्सीडेंट रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल जहां चेन्नई में सर्वाधिक 7486 सड़क हादसे हुए।

दिल्ली में इससे कम 7375 हादसे होने के बावजूद सबसे ज्यादा 1591 लोग मारे गए। इसका कारण संभवत: दिल्ली में ज्यादा चौड़ी सड़कों पर ज्यादा बड़ी, आधुनिक व तेज रफ्तार गाडि़यों तथा उन्हें चलाने वालों में 25-35 वर्ष के युवाओं का अधिक प्रतिशत होना हो सकता है।

पिछले साल बंगलूर में 5323 हादसे, इंदौर में 5143, कोलकाता में 4104 तथा मुंबई में 3379 सड़क हादसे दर्ज किए गए। सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वालों में चेन्नई का स्थान सबसे ऊपर रहा, जहां 7349 लोग घायल हुए।

दस लाख से ऊपर आबादी वाले शहरों में सबसे ज्यादा 69.9 फीसद भयानक हादसे लुधियाना में दर्ज किए गए। तेज रफ्तार आधुनिक व बड़ी कारों का फैशन, ट्रकों की अधिक आवाजाही तथा शराब पीकर गाड़ी भगाने का शौक इसका कारण हो सकता है। कुल मिलाकर 18.7 फीसद सड़क हादसे दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में ही दर्ज किए गए हैं। हादसों में 11.8 फीसद मौतों और 16.7 फीसद घायलों का संबंध भी इसी श्रेणी के शहरों से है।

नए वाहन, ज्यादा हादसे

देश में होने वाली 40.3 फीसद सड़क दुर्घटनाएं पांच साल से कम पुराने वाहनों से होती हैं। इसकी वजह इस आयुवर्ग के वाहनों की सबसे ज्यादा संख्या होना है। नए वाहनों की रफ्तार भी अपेक्षाकृत अधिक रहती है। जैसे-जैसे वाहनों की आयु बढ़ती जाती है, उनका उपयोग, स्पीड और हादसे भी कम होते जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार 32.7 फीसद दुर्घटनाओं का संबंध 5-10 वर्ष पुराने वाहनों से पाया गया। इसी तरह 10-15 वर्ष पुराने वाहनों से 15.4 फीसद और 15 वर्ष से ज्यादा पुराने वाहनों से केवल 9.4 फीसद हादसे होते पाए गए हैं।

25-35 वर्ष के ड्राइवर खतरनाक

सबसे ज्यादा हादसे 25-35 आयु वर्ग के वाहन चालकों के हाथों होते हैं। क्योंकि यही वर्ग सबसे ज्यादा तेज गति से वाहन चलाता है और सबसे ज्यादा नियमों का उल्लंघन करता है। वर्ष 2016 में इस वर्ग के चालकों ने 1,31,142 सड़क दुर्घटनाओं में 37,252 लोगों को मार दिया। इसके बाद 18-25 आयुवर्ग के ड्राइवरों का नंबर है जिनके हाथों 1,15,053 सड़क हादसों में 30,661 लोग मारे गए। 35-45 आयु वर्ग के चालकों के हाथों दुर्घटनाएं तो 1,06,626 ही हुई, लेकिन मरने वालों का आंकड़ा थोड़ा ज्यादा 31,041 रहा। सबसे ज्यादा सावधानीपूर्वक और धीमी गति से वाहन चलाने वाले साठ वर्ष से ऊपर आयुवर्ग के लोगों से सबसे कम 16,492 हादसे हुए और इनमें सबसे कम 4,505 लोगों की मौत हुई।

पढ़ाई के साथ लापरवाही

रिपोर्ट से एक चौकाने वाला तथ्य सामने आया है। आम तौर पर समझा जाता है कि पढ़े-लिखे लोग बेहतर गाड़ी चलाते हैं। लेकिन रिपोर्ट से पता चलता है कि दसवीं पास या उससे ज्यादा पढ़े चालकों ने सबसे ज्यादा 1,85,495 हादसे किए। जबकि आठवीं-दसवीं पास ड्राइवरों से केवल 1,49,795 और केवल आठवीं तक पढ़े ड्राइवरों के हाथों केवल 89,936 दुर्घटनाएं हुई। इन आंकड़ों से सरकार को मोटर वाहन संशोधन विधेयक में ड्राइवरों की शैक्षिक योग्यता को घटाकर आठवीं पास करने का आधार मिल सकता है। हालांकि ट्रांसपोर्ट विशेषज्ञों ने इसका विरोध किया है और ज्यादा पढ़े-लिखे ड्राइवरों की वकालत की है।

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