चंडीगढ़। पीजीआइ प्रशाासन ने गोरखपुर, झारखंड व महाराष्ट्र में ऑक्सीजन की कमी से हुई मरीजों की मौतों से भी सबक नहीं सीखा। पीजीआइ में शनिवार देर रात ऑक्‍सीजन न मिलने से महिला की मौत हो गई। वह स्वाइन फ्लू से पीड़ित थी। उसके परिजन 40 मिनट तक पीजीआइ के चिकित्सकों व स्टाफ की मिन्नतें करते रहे कि मरीज को ऑक्सीजन का सिलेंडर मुहैया करवा दो, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। उनका जवाब था सिलेंडर भरने गए हैं कहां से दें। जब आएंगे दे देंगे।

पीड़िता की तबीयत बिगड़ने पर जब आधे घंटे बाद चिकित्सकों के अंदर का इंसान जागा तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जानकारी के अनुसार, स्वाइन फ्लू पीड़ित जालंधर निवासी मीनाक्षी को उसके परिजन करीब पौने सात बजे पीजीआइ लेकर पहुंचे। करीब आधे घंटे तक पीड़िता इमरजेंसी के बाहर तड़पती रही। उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी।

एंबुलेंस में आक्सीजन सिलेंडर फिक्स था, इसलिए उसे मरीज के साथ अंदर ले जाना असंभव था। जब स्टाफ व चिकित्सकों ने देखा कि मरीज की हालत अब बहुत ही ज्यादा बिगड़ गई है तब आनन-फानन में सिलेंडर दे दिया। असंवेदनशीलता के चलते मरीज को समय पर ऑक्सीजन न मिलने व इलाज में देरी के कारण उसकी मौत हो गई।

परिजनों के अनुसार उस समय तैनात पीजीआइ की महिला स्टाफ ने कहा कि हमारे पास भरे हुए आक्सीजन सिलेंडर नहीं है, मरीज को बिना आक्सीजन सिलेंडर के अंदर ले आओ। सिलेंडर बाहर नहीं जाएगा। मीनाक्षी की रेफरल रिपोर्ट में सिविल अस्पताल जालंधर ने साफ लिखा था कि उसे स्वाइन फ्लू है, इसके बावजूद इलाज में देरी की।

कोई पहली बार नहीं था, जब ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी हुई हो। कई मरीजों ने बताया कि रोज शाम को ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी से मरीजों व उनके तीमारदारों को परेशान होना पड़ता है। डॉक्टर-स्टाफ सबका एक जवाब थ। डॉक्टर पीआर आशुतोष व अन्य स्टाफ ने कहा कि अभी ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी है, सिलेंडर भरने के लिए गए हैं। आप इत्मीनान रखें जल्द ही सिलेंडर मंगवाया जा रहा है।

मीनाक्षी के पति शाम सहगल ने कहा कि उनकी पत्नी ऑक्सीजन के कारण 30 से 40मिनट तड़पती रही। जालंधर से एंबुलेंस में आते समय वह ठीक थी और सबसे बात कर रही थी। हेल्पलाइन नंबर तक बंद थे। पीजीआइ में अव्यवस्था का आलम यह है कि इमरजेंसी के बाहर मरीजों को ले जाने के लिए एंबुलेंस सेवा जो नंबर लिख रखे हैं जब उन्हें परिजनों ने ट्राई किया तो एक भी नहीं चल रहा था।

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