वाराणसी । बवाल के बाद रविवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर स्थित छात्रावासों में खामोशी रही लेकिन छात्रगुटों में बदले की आग अब भी सुलग रही है। परिसर में तनाव बना हुआ है। बिड़ला व लालबहादुर शास्त्री छात्रावास के आसपास अभी भी पुलिस व एक प्लाटून पीएसी तैनात है। प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्य भी छात्रों की गतिविधियों पर नजर रखे हैं।

खुफिया तंत्र भी सक्रिय है ताकि छात्रों के बीच चल रही हलचल की जानकारी मिल सके। गत आठ सितंबर को बीएचयू के कला संकाय में रैगिंग का आरोप लगाते हुए एक छात्र को कई छात्रों ने जमकर पीटा था। शाम होते-होते यह लड़ाई दो हास्टलों के बीच हो गई। इस दौरान छात्र दो गुटों में बंट गए। बिड़ला और लालबहादुर शास्त्री छात्रावास के छात्रों ने एक दूसरों को जमकर पीटा, ईंट-पत्थर चले। मारपीट में करीब आधा दर्जन छात्र जख्मी भी हो गए।

अवैध रूप से रह रहे छात्रों ने दी हवा: बीएचयू में मारपीट का कारण रैगिंग माना जा रहा है। इसकी जांच पुलिस-प्रशासन ही नहीं एंटी रैगिंग सेल भी कर रहा है। हालांकि छात्रावास के छात्र ही इसे वर्चस्व की लड़ाई मान रहे हैं। इसको हवा देने वाले अवैध रूप से लालबहादुर शास्त्री छात्रावास में रह रहे छात्र बताए जा रहे हैं। हालांकि मारपीट के बाद बीएचयू प्रशासन ने छात्रावास के 19 कमरों को कब्जा मुक्त करा लिया है। इन कमरों को आवंटित करने का भी दावा किया जा रहा है।

छापेमारी की पहले से थी भनक: विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि लालबहादुर शास्त्री छात्रावास में अवैध रूप से रह रहे युवकों से कमरा नौ सितंबर को खाली करा लिया गया। छापेमारी कर सघन तलाशी भी ली गई। दूसरी ओर छात्रावास में रहने वाले कुछ छात्रों की मानें तो अवैध रूप से रहने वाले युवकों को छापेमारी की भनक पहले ही लग गई थी। उन्होंने अपना सामान उसी छात्रावास के दूसरे कमरों में रख दिया।

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