बीजिंग। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल बाजार चीन में पेट्रोल-डीजल वाहनों पर बैन की तैयारी शुरू हो गई है। देश में वाहन निर्माता कंपनियों को समयसीमा दी गई है कि वे अब पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों की बिक्री बंद करें, ताकि ‘इलेक्टि्रक वाहन’ विकसित करने में तेजी लाई जा सके।

चीन के उद्योग व संचार मंत्री शिन गुओबिन ने बताया कि पेट्रोल-डीजल वाहनों के उत्पादन और बिक्री को रोकने के लिए एक टाइमटेबल बनाने को लेकर सरकार अन्य रेग्युलेटर्स के साथ मिलकर काम कर रही है। शिन ने कहा कि इस कदम से पर्यावरण और चीन के ऑटो उद्योग के विकास पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा। इस प्रतिबंध से चीन की और विदेशी वाहन निर्माता कंपनियों को इलेक्ट्रिक वाहन बनाने में जोर देने में मदद मिलेगी। नियमों की सख्ती के जरिए ही ऐसे वाहनों की बिक्री बढ़ेगी, जिससे वायु प्रदूषण तेजी से कम होगा।

उन्होंने बताया कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों को सबसिडी भी मुहैया करवाएगी। चीन यह प्रतिबंध कब लागू करेगा, यह फिलहाल तय नहीं है, लेकिन अगले साल से वह आंशिक प्रतिबंध शुरू कर सकता है। कार्बन उत्सर्जन कम करने की कोशिश चीन वर्ष 2030 तक अपने देश में कार्बन उत्सर्जन पर लगाम लगाने की कोशिश में है। इससे पहले ब्रिटेन और फ्रांस भी घोषणा कर चुके हैं कि वे साल 2040 तक डीजल और पेट्रोल से चलने वाली गाडि़यों को पूरी तरह से बैन कर देंगे, ताकि वैश्विक तापमान वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने वाले लक्ष्य तक पहुंचा जा सके।

इधर भारत में भी पेट्रोल, डीजल की कारों को सड़कों से हटाने के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। सरकार ने ऑटोमोबाइल कंपनियों को वैकल्पिक ईंधन अपनाने के लिए सख्‍त चेतावनी दी है। कंपनियों को चेतावनी देते हुए परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि या तो वे वैकल्पिक ईंधन की तकनीक अपना लें या फिर सख्‍त परिणाम भुगतने के लिए तैयार हो जाएं। उन्‍होंने कहा कि हमें वैकल्पिक ईंधन की ओर बढ़ना है और इसमें वह तेजी से काम कर रहे हैं।

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