नई दिल्ली [स्पेशल डेस्क] । साल 1984 के आम चुनाव में कांग्रेस को जहां 426 सीटों पर शानदार कामयाबी मिली थी, वहीं भारतीय राजनीति में अपने आपको स्थापित करने की कोशिश में जुटी भाजपा को महज दो सीट हासिल हुई थीं। लेकिन साल 1984 से लेकर 2014 तक का कालखंड दिलचस्प है। भारतीय राजनीति में स्थापित हो चुकी कांग्रेस का अवसान हो रहा था। ये बात अलग है कि 2004 से लेकर 2014 तक यूपीए सरकार की कांग्रेस अगुवाई कर रही थी। इन सबके बीच कांग्रेस की नीतियों की खामियों को उजागर करते हुए भाजपा धीरे-धीरे अपने आपको देश के सभी हिस्सों में स्थापित करने की पूरजोर कोशिश में जुटी हुई थी। 2014 के आम चुनाव में भाजपा ने जबरदस्त कामयाबी हासिल की। देश में 1984 के बाद पहली बार किसी पार्टी को लोगों ने अपने बूते सरकार चलाने का जनादेश दिया।

2014 में कांग्रेस का प्रदर्शन शोध का विषय है। कांग्रेस के रणनीतिकार भी इस बात को मानते थे कि यूपीए- दो के दौरान घोटालों की खबरों ने कांग्रेस के चेहरे को बदरंग कर दिया था। ये बात अलग है कि जब इस विषय पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से पूछा जाता था तो वो भारत की धरती पर जवाब देने में कन्नी काटते थे। लेकिन अमेरिका के बर्कले विश्वविद्यालय में राहुल का अंदाज अलग था। जब वो छात्रों से रूबरू हो रहे थे तो उन्होंने एक बात कही कि अहंकार की चादर ने कांग्रेस पार्टी को 2012 में अपने आप में लपेट लिया था।

दंभ में चूर थी कांग्रेस

राहुल गांधी ने माना कि साल 2012 के आसपास कांग्रेस दंभ में चूर थी, इसलिए काफी नुकसान उठाना पड़ा। बता दें कि राहुल की मां सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष हैं और जिस कालखंड की वह बात कर रहे हैं, उस दौरान सोनिया की पार्टी पर मजबूत पकड़ थी। हालांकि इसके बाद धीरे-धीरे राहुल गांधी का कद पार्टी में बढ़ा है। उन्होने कहा, इसके बाद पार्टी को पुनर्निर्माण की जरूरत है। कांग्रेस के दिग्‍गज नेताओं ने गलतियां की थीं। 2012 में एक निश्चित दंभ पार्टी में आ गया था और हमने जनता के साथ बातचीत करनी बंद कर दी थी। इसके बाद हमें पार्टी का पुनर्निर्माण करने की आवश्‍यकता थी, हमें एक ऐसा विजन तैयार करने की जरूरत है जो हमें आगे बढ़ने में मदद करे। देखिए, भाजपा इस समय जो कुछ भी कर रही है, वो सब हम पहले ही कह चुके हैं, जैसे कि मनरेगा और जीएसटी।

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