आज हम स्वामी विवेकानंद और नवाचार के बारे में बात करने जा रहे हैं. स्वामी विवेकानंद के बारे में तो आप सब जानते ही हैं. स्वामी विवेकानन्द का विज़न था एकल भारत का विजन था. उनका कहना था- ”मैं भारतीय हूं और हर भारतीय मेरा भाई है. अबोध भारतीय, गरीब एवं फक्कड़ भारतीय, ब्राह्मण भारतीय, अछूत भारतीय मेरा भाई है.” यह वही ”वसुधैव कुटुंबकम” की अप्रतिम भावना है.

वैसे तो राष्ट्रवाद के अभ्युदय को पश्चिमी प्रभाव की देन माना जाता है, लेकिन स्वामी विवेकानन्द का राष्ट्रवाद भारतीय आध्यात्मिकता एवं नैतिकता से पूरी तरह ओत-प्रोत है. औपनिवेशिक भारत में जबरदस्त ढंग से उभरे राष्ट्रवाद की अवधारणा में उनका अहम योगदान रहा था और उन्होंने 20वीं शताब्दी में भारत की कामयाब छलांग सुनिश्चित करने में विशेष भूमिका निभाई थी. 20वीं शताब्दी के युवाओं पर उनका जबरदस्त प्रभाव रहा है. यह वही भावना है, कि हम तो आत्मवत सर्वभूतेषु य: पश्यति स: पंडित: को मानने वाले लोग हैं अर्थात ऐसे लोग जो सभी में अपना ही रूप देखते हों.
नवाचार का अर्थ है नवीन प्रणाली, विधि या तरीका. नवाचार के बारे में हम अपने अनुभव से कुछ-कुछ कह सकते हैं, कि नवाचार किया नहीं जाता, हो जाता है. अब देखिए न! नवरात्रे आने वाले हैं. नवरात्रों में कंजको को भोजन खिलाने और पैक करके ले जाने के लिए लंच बॉक्सेज़ की ज़रूरत होती है. अभी से ही पूरा बाजार प्यारे-प्यारे नई डिज़ाइन के लंच बॉक्सेज़ से भरा पड़ा है. ध्यान से देखिए तो बिजनेस का यह नवाचार ही कहा जाएगा, हालांकि दुकानदारों का यह बिजनेस चमकाने का एक फंडा मात्र है.

स्वामी विवेकानंद के विश्व प्रसिद्ध शिकागो भाषण की 125वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने विज्ञान भवन में ‘युवा भारत, नया भारत’ विषय पर युवाओं को संबोधित किया. पीएम ने एक तरफ स्वामी विवेकानंद को देश-दुनिया के गौरव से जोड़ते हुए युवाओं को उनकी ही तरह संकल्प लेने को प्रेरित किया.

पीएम मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि 125 साल पहले शिकागो में दिए गए स्वामी विवेकानंद का भाषण आज भी प्रासंगिक है. पीएम बोले, ‘साल 2001 से पहले 9/11 को कोई नहीं जानता था लेकिन 125 साल पहले भी शिकागो में 9/11 हुआ था, जहां विवेकानंद ने अपने भाषण से गहरी छाप छोड़ी थी. विवेकानंद की हर बातें हमें ऊर्जा भर देती है. अपने अल्प जीवन में उन्होंने गहरी छाप छोड़ी. विवेकानंद ने पूरे भारत में घूम-घूमकर हर बोली को आत्मसात किया. 125 साल पहले यह कैसा दुर्लभ क्षण होगा, जब भारत से आए एक युवक ने पूरी दुनिया का दिल जीता होगा.’ अपने अल्प जीवन में विवेकानंद का पूरे भारत में घूम-घूमकर हर बोली को आत्मसात करना भी नवाचार का एक रूप है. अपनी भाषा में समझाई जाने वाली बात गहरा असर करता है. यह भी नवाचार का एक रूप ही तो है.
मोदी जी ने यह भी कहा, ‘वह भारत के लिए गौरव का पल था. एक तरफ रवींद्रनाथ टैगोर को साहित्य में नोबेल पुरस्कार मिला तो दूसरी तरफ स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषण से पूरी दुनिया में धमक जमाई. इस शख्स ने रामकृष्ण मिशन को जन्म दिया, विवेकानंद मिशन को नहीं. यह उनकी महानता को दर्शाता है. जिस भाव से रामकृष्ण मिशन का जन्म हुआ, वह आंदोलन उसी भाव से अब भी चल रहा है. विवेकानंद ने भारत की ताकत से सबको अवगत कराया. उन्होंने सामाजिक बुराई के खिलाफ भी आवाज बुलंद की.’ सामाजिक बुराई के खिलाफ आवाज बुलंद करना भी नवाचार ही कहा जाएगा.

‘मेक इन इंडिया’ की वकालत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बारे में हमें स्वामी विवेकानंद और जमशेदजी टाटा के संवाद को देखना चाहिए, तब हमें पता चलेगा कि स्वामी विवेकानंद ने टाटा से कहा था कि भारत में उद्योग लगाओ और निर्माण करो. मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद कृषि में आधुनिक तकनीक के प्रयोग के पक्षधर थे. प्रधानमंत्री ने इस दौरान दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय और विनोबा भावे की पहल का भी जिक्र किया. कृषि में आधुनिक तकनीक के प्रयोग के पक्षधर होना भी नवाचार ही कहा जाएगा.

शिकागो में स्वामी विवेकानंद के संबोधन की 125वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 11 सितंबर 1893 को शिकागो में स्वामी विवेकानंद का संबोधन मात्र भाषण नहीं था, बल्कि यह एक तपस्वी की तपस्या का सार था. वरना उस समय तो दुनिया में हमें सांप, संपेरों और जादू टोना करने वालों के रूप में देखा जाता था. भारत के रूप से दुनिया को परिचित कराना भी नवाचार की श्रेणी में आता है.

जाने-अनजाने हम भी हर समय नवाचार की दुनिया में भ्रमण करते हैं. हम आपको अपना निजी अनुभव बताते हैं. बचपन हम खुद बच्चे होते हुए भी खुद द्वारा स्थापित ‘बालकन की बारी’ संस्था से अनजाने में ही नवाचार करते रहे. मुझे कविता का शौक था और कविता लिखने का थोड़ा-बहुत हुनर होने के कारण उनको कविता का सृजन सिखाते रहे. सती खिलनानी स्वतंत्रता सेनानियों की बेटी थ्व्व और भाषण कला में निपुण, सो वह बच्चों को भाषण लिखने-देने का प्रशिक्षण देती रही. तब हमें कहां पता था, कि हमारे इस छोटे-से प्रयास से बहुत से कवि और भाषणविद तैयार हो जाएंगे. बाद में सोचा तो अनुभव हुआ, कि यह नवाचार ही तो है.

हमारा कविता और लेखन का प्रेम बढ़ता चला गया और हम अध्यापन में भी इसका भरपूर प्रयोग करते रहे. इसी प्रयास के चलते अध्यापकों के लिए एक प्रतियोगिता के लिए हमारे विद्यालय में ”विद्यालयी शिक्षा में नवाचार एवं अभिनव प्रयोग” का सर्क्यूलर आ गया. सर्क्यूलर बहुत देर से आने के कारण हमें प्रतियोगिता की तैयारी के लिए महज कुछ दिनों का समय मिला. नवाचार प्रतिय्गिता की विषयवस्तु पहले से ही तैयार होने के कारण हमने इस प्रतियोगिता में सफलतापूर्वक प्रतिभागिता की और सबसे पहला पुरस्कार हमारे हिस्से ही आया.

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