नई दिल्ली
50 माइक्रोन से पतले प्लास्टिक पर नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने बैन लगा दिया है। अगर किसी के पास यह प्लास्टिक पाया जाता है तो उससे 5 हजार रुपये पर्यावरण सेस वसूला जाएगा।

क्या है NGT का आदेश?
नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने वक्त-वक्त पर प्लास्टिक और पॉलिथीन के इस्तेमाल के बारे में कई आदेश जारी किए हैं। इनमें एक आदेश पिछले साल दिसंबर का है। ट्रिब्यूनल ने दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए नॉन डिस्पोजेबल प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया था। एडवोकेट गौरव बंसल बताते हैं कि इस आदेश के मुताबिक प्लास्टिक के गिलास, चम्मच, थाली आदि तमाम चीजें शामिल हैं। थर्मॉकॉल के बने कप, प्लेट और मल्टिलेयर्ड बर्तन जिन पर प्लास्टिक की लेयर होती है, भी बैन हैं। एनजीटी ने 50 माइक्रोन से पतली प्लास्टिक पर बैन कर दिया है। 50 माइक्रोन से नीचे की प्लास्टिक की न तो मैन्युफैक्चरिंग और न ही सेल की जा सकती है। इस बैन में प्लास्टिक के वे डिस्पोजेबल कप और गिलास भी आते हैं जिन पर पतली पॉलिथीन की लेयर होती है या पतली प्लास्टिक से बने होते हैं।

बैन क्यों?
50 माइक्रोन से ज्यादा के प्लास्टिक को री-साइकल किया जा सकता है, जबकि 50 माइक्रोन से पतले प्लास्टिक के साथ ऐसा नही किया जा सकता। इस वजह से पर्यावरण को काफी नुकसान होता है।

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