भोपाल। टेलीफोन का उपयोग करने के मामले में मध्यप्रदेश साल दर साल आगे बढ़ रहा है, लेकिन स्कूलों के एडमिशन के मामले में सूबे का ग्राफ नीचे आता जा रहा है। नीति आयोग की वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक 2005 में मप्र में हर 100 में से 5 लोगों के पास फोन था। वहीं 100 में से 94 बच्चे प्राथमिक स्कूलों में प्रवेश लेते थे। करीब दस साल में इन दोनों ही क्षेत्रों में बड़ा बदलाव हुआ है। फोन बढ़ते गए और शिक्षा से लोग दूर होते गए।

नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक मप्र में 2015 में हर 100 में से 60 लोगों के पास टेलीफोन पहुंच गया, लेकिन प्राथमिक स्कूलों में एडमिशन की बात करें तो प्रवेश 100 में से 94 लोगों से घटकर 79 पर पहुंच गया। गौरतलब है कि पिछले दिनों ही नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद्र ने भोपाल दौरे के दौरान मप्र सरकार को खरी-खरी सुनाते हुए कहा था कि प्रदेश में स्कूल ड्रॉप आउट बहुत ज्यादा हैं, इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।

हर साल 20 हजार करोड़ का बजट

मप्र में स्कूल शिक्षा विभाग का इस साल का बजट करीब 18 हजार करोड़ रुपए है। पिछले दो सालों से यह बजट करीब 20 हजार करोड़ रुपए के आसपास रहा है। पिछले दो सालों में मप्र सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग को सबसे ज्यादा बजट दिया। इसके बावजूद सरकारी सिस्टम प्रदेश के स्कूलों में प्रवेश की संख्या नहीं बढ़ पा रही है। स्कूलों में प्रवेश बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर पर मिड-डे मील, साइकल वितरण सहित कई योजनाएं भी चलाई जा रही हैं।

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