मुंबई के पास ही डोंबिवली में रहने वाली शुभद्रा कुछ काम करके अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी। लेकिन पति और तीन साल के बच्चे से जुड़ी जिम्मेदारियों के कारण वह कुछ नहीं कर पा रही थी। एक दिन उसे अपनी ही कॉलोनी की आशा भारती ने डायरेक्ट सेलिंग कंपनी क्यूनेट के बारे में बताया और उसकी स्कीम बताई। शुरू में कुछ परेशानी हुई, लेकिन परिवार, मित्रों और रिश्तेदारों के सहयोग से उसका काम चल निकला। आज वह 1 लाख रुपये महीना तक कमा लेती है। ऐसे हजारों-लाखों लोग (जिनमें अधिकांश महिलाएं हैं) डॉयरेक्ट सेलिंग कारोबार में लगे हुए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ में कुछ दिन पहले लोगों, खासकर महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए डायरेक्ट सेलिंग जैसी स्कीमों में शामिल होने का सुझाव दिया था। उनका कहना था कि इसमें एक तो काम के घंटे तय नहीं होते। जब परिवार से कुछ पल खाली मिले तो यह किया जा सकता है। दूसरी बात, इसमें बड़ी पूंजी की जरूरत नहीं होती। इसमें आप शुरू में उपभोक्ता होते हैं, लेकिन बाद में वस्तु या स्कीम के अच्छे लगने पर आप उसे दूसरों को रिकमंड करते और धीरे-धीरे उद्यमी बन जाते हैं।

दिलचस्प बात है कि प्रधानमंत्री के इस विचार को उनकी ही सरकार धरातल पर नहीं उतरने दे रही। पिछले साल उपभोक्ता कार्य मंत्रालय ने इस उद्योग की शंकाओं-आशंकाओं के समाधान के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए थे। सरकार ने कहा था कि इन दिशा-निर्देशों में तमाम राज्य सरकारें अपनी ओर से अपनी जरूरत के अनुसार संशोधन कर सकती हैं। लेकिन इंडियन डायरेक्ट सेलिंग असोसिएशन (आईडीएसए) के महासचिव अमित चड्ढा का कहना है कि ये केवल दिशा-निर्देश हैं और इन्हें कानूनी रूप देने के लिए न तो केंद्र ने कुछ किया है और न ही राज्य सरकारों ने।
पिछली यूपीए सरकार ने बहुस्तरीय मार्केटिंग और डायरेक्ट सेलिंग की परिभाषा तय करने और असली तथा नकली कंपनियों के बीच भेद करने के दिशानिर्देश निर्धारित करने के लिए एक अंतरमंत्रालय समिति बनाई थी। लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिली। उपभोक्ता कार्य मंत्रालय की अध्यक्षता में यह समिति इस बात पर विचार ही कर रही है कि इस क्षेत्र के लिए अलग नियामक चाहिए या नहीं।

किसी कानूनी शक्ल के अभाव में करोड़ों-अरबों का यह कारोबार अभी भी संदेह की निगाह से देखा जाता है। इसी कमी के चलते पिछले दिनों क्यूनेट के मुंबई में कारोबारी और जाने-माने बिलियर्ड्स चैंपियन 80 वर्षीय माइकल फरेरा को कई महीने जेल में रहना पड़ा था। उनके विरुद्ध 19 जगह एफआईआर दर्ज की गई। इस क्षेत्र में सबसे बड़ी कंपनी एमवे इंडिया के रजिडेंट डायरेक्टर विलियम पिंकने को भी केरल पुलिस ने मई 2013 में पकड़ लिया था। उन पर प्राइज चिट्स ऐंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स बैनिंग ऐक्ट (पीसीएमसी ऐक्ट) के उल्लंघन का आरोप था। क्यूनेट के कानूनी निदेशक जहीर मर्चेंट मानते हैं कि सरकारी बेरुखी के चलते आईडीएसए ने अपने सदस्यों से कहा है कि वे स्वयं ही अपनी आचार संहिता तैयार करें और अपने कारोबार में पारदर्शिता रखें।
भारत में शुभद्रा और आशा जैसे 60 लाख लोग ‘डायरेक्ट सेलिंग’ (सीधी बिक्री) के धंधे से जुड़े हैं, जो क्यूनेट, एमवे इंडिया, टपरवेयर, मोदीकेयर, एवॉन, हिंदुस्तान यूनीलिवर नेटवर्क और हर्बलाइफ जैसी नामी कंपनियों के लिए काम करते हैं। ये लोग सालाना 7000 करोड़ रुपये से ऊपर का कारोबार करते हैं। इन डायरेक्ट सेलर में 60 प्रतिशत महिलाएं हैं। सरकार ने बीमा उद्योग की गड़बड़ियों को दूर करने के लिए ‘इरडा’ और फोन उपभोक्ताओं की शिकायतों के निवारण के लिए ‘ट्राई’ बनाया है। उसी तरह यदि इस क्षेत्र के लिए भी कोई नियामक बन जाए तो यह क्षेत्र महिलाओं के लिए अपने पैरों पर खड़ा होने का एक बड़ा प्लैटफॉर्म हो सकता है।

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