हमारा बीता हुआ कल कितना समृद्ध और खूबसूरत था, आने वाली पीढ़ी को यह बताने के लिए हमारे ‘कल’ की धरोहरों को आज बचाना जरूरी है। इंसानों की बेपरवाही और मनमर्जी की कीमत टूरिस्ट स्पॉट्स को उठानी पड़ रही है। अपनी ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने और संवारने के लिए यूनाइटेड नेशन वर्ल्ड टूरिजम ऑर्गनाइजेशन (UNWTO) ने साल 2017 को इंटरनैशनल इयर ऑफ सस्टेनबल टूरिजम फॉर डिवेलपमेंट घोषित किया है। इसके जरिए नेचर और कल्चर को सहेजने वाले टूरिस्ट स्पॉट्स को बचाने के साथ ही लोकल इकॉनमी को विकसित करने में भी मदद होगी। 27 सितंबर को हर साल वर्ल्ड टूरिजम डे मनाया जाता है। इस मौके पर हमने टूर और ट्रैवल ऑपरेटर्स से सस्टेनबल टूरिजम की जरूरत को जानने की कोशिश की…

इंजॉय करें, बर्बाद नहीं
होटल ऐंड रेस्त्रां असोसिएशन के अध्यक्ष सुनील सत्यवक्ता कहते हैं कि हम कुदरत के करीब जाने के नाम पर नदी, पहाड़ और समुद्र किनारे तो चल देते हैं लेकिन क्या हम यह चाहते हैं कि ये सारी चीजें हमारी आने वाली जेनरेशन के लिए भी सलामत बची रहें। अक्सर टूरिस्ट अपनी जर्नी को यादगार बनाने के चक्कर में नेचर और उससे जुड़ी चीजों को नुकसान पहुंचाना भी जायज मानते हैं। हमें टूरिस्ट्स को इस तरह तैयार करना चाहिए कि वे बिना कुदरत को नुकसान पहुंचाए उसे इंजॉय करें। नदी या बीच किनारे टेंट लगाकर, बॉन फायर जलाकर जाते वक्त खाने-पीने और दूसरी वेस्ट चीजें वहीं फैलाकर चले जाना अच्छा नहीं है। टूरिस्ट्स की ऐसी आदतों से पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में हमें ध्यान रखना होगा कि किसी भी जगह को इंजॉय करने के नाम पर खराब करने के बजाय उसे संभाल कर रखें।

अपने कल्चर को करें प्रमोट
इंडियन असोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स के चेयरमैन प्रतीक हीरा बताते हैं कि सस्टेनबल टूरिजम के तहत अगर हम काम करते हैं तो इसका सबसे ज्यादा फायदा लोकल आर्टिस्ट्स और इकॉनमी को होगा। जैसे राजस्थान में ज्यादातर होटल्स और रिजॉर्ट्स में वहां के लोकल कलाकार कालबेलिया डांस करते हुए नजर आ जाते हैं। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में टूरिस्ट इकट्ठा होते हैं। इससे न सिर्फ वहां का कल्चर जिंदा है बल्कि लोकल आर्टिस्ट भी प्रमोट हो रहे हैं। उन्हें काम मिल रहा है। साथ ही यह इकॉनमी को भी बढ़ाने में मदद कर रहा है। हालांकि, यह चीज देश के दूसरे हिस्सों में कम नजर आती है। यही चीज अगर हम यूपी से जोड़कर देखें तो कितना फायदा होगा। अगर यूपी के अलग-अलग शहरों को हम टूरिस्ट स्पॉट्स के रूप में डिवेलप करना चाहते हैं तो यहां भी कथक जैसी परफॉर्मेंस शुरू की जा सकती है। इससे प्रदेश के लोगों को न सिर्फ काम मिलेगा बल्कि लोग अवध और यहां का कल्चर भी जान सकेंगे।

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