नई दिल्ली। दिल्ली गाजियाबाद मेरठ कॉरीडोर पर रेपिड रेल योजना जल्द ही रफ्तार लेगी। दिल्ली सरकार नें इसका कैबिनेट तैयार कर दिया है। अब केवल मंत्रिमंडल की स्वीकृति का इंतजार है। उधर, प्रस्तावित कॉरीडोर की जमीन पर मिटटी की जांच का कार्य भी सोमवार तक आरंभ कर दिए जाने की संभावना है।

डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में इस कॉरीडोर की अनुमानित लागत 32 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें पांच हजार करोड़ उत्तर प्रदेश सरकार, एक हजार करोड़ दिल्ली सरकार और छह हजार करोड़ केंद्र सरकार को देना है, जबकि 20 हजार करोड़ रुपये का ऋण लिया जाएगा।

आला अधिकारियों के मुताबिक एनसीआर ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन की बोर्ड बैठक में स्वीकृत होने के बाद दिल्ली- गाजियाबाद और मेरठ कॉरीडोर की डीपीआर दिसंबर 2016 में उत्तर प्रदेश सरकार और दिल्ली सरकार को उनकी स्वीकृति के लिए भेजी गई थी।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने तो मई 2017 में डीपीआर को मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दे दी। लेकिन दिल्ली सरकार के यहां अभी भी योजना को मंजूरी मिलने का इंतजार है।

सूत्रों की मानें तो दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत रेपिड रेल की इस योजना और इस कॉरीडोर को लेकर खासे उत्साहित हैं। गत माह एनसीआर ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के अधिकारियों संग एक बैठक में उन्होंने इस संबंध में सकारात्मक संदेश भी दिया था।

ताजा जानकारी यह है कि योजना को मंजूरी देने के लिए दिल्ली सरकार ने इसका कैबिनेट नोट तैयार करा लिया है। जल्द ही मंत्रिमंडल की बैठक में इसे स्वीकृति दे दी जाएगी।

90 किलोमीटर लंबे इस कॉरीडोर पर 16 स्टेशन होंगे। 30 किलोमीटर का ट्रेक भूमिगत जबकि 60 किलोमीटर का एलीवेटिड बनाया जाएगा। डीपीआर के मुताबिक इस कॉरीडोर योजना के 16 स्टेशन होंगे। सराय काले खां, आनंद विहार, साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर, दुहाई, मुरादनगर, मोदीनगर, शताब्दी नगर, मेरठ सेंट्रल-एचआरएस चौक, बेगम पुल, मेरठ नार्थ, मोदीपुरम, हापुड़ रोड और शास्त्री नगर।

अंतरिम डिटेल्ड डिजाइन कंसलटेंट नियुक्त

दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरीडोर योजना के पहले सेक्शन के लिए बुधवार को एनसीआर ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ने अंतरिम डिटेल्ड डिजाइन कंसलटेंट भी नियुक्त कर दिया है। यह कंसलटेंट एजेंसी 60 किलोमीटर लंबे एलीवेटिड ट्रेक के लिए रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट के आने पर ही निर्माण कार्य शुरू होगा।

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