नई दिल्ली। पिछले साल 28-29 सितंबर की रात में पाकिस्तान में घुसकर आतंकी शिविरों को तबाह करने वाली सर्जिकल स्ट्राइक के इंचार्ज रहे ले. जनरल (रि.) डीएस हुड्डा ने कहा है कि सारे ऑपरेशन को दिल्ली व ऊधमपुर में लाइव देखा जा रहा था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि दिल्ली में कौन इस पर नजर रख रहा था, लेकिन लाइव फोटो व वीडियो दिल्ली जा रहे थे।

गौरतलब है कि अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए अमेरिकी कार्रवाई को इसी तर्ज पर वाशिंगटन में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा, विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन व शीर्ष अधिकारी लाइव देख रहे थे। पाकिस्तान के एबटाबाद में ओसामा को मार गिराया गया था। भारतीय सेना की तरफ से पाकिस्तान में की गई सर्जिकल स्ट्राइक की पूरी कहानी सेना के रिटायर्ड ले. जनरल डीएस हुड्डा ने एक चैनल पर बयान की है। भारतीय सेना ने पिछले साल यह सर्जिकल स्ट्राइक की थी जिसमें टेररिस्ट लांच पैड को निशाना बनाया गया था। उस समय वह उत्तरी कमान के प्रमुख थे।

हुड्डा ने बताया कि 18 सितंबर को उड़ी में 18 जवान शहीद हो गए थे। इससे हमें काफी धक्का लगा था। हमें काफी नुकसान हुआ था। सेना और सरकार की तरफ से यह फैसला ले लिया गया कि इसका जवाब देना जरूरी है। वह खुद ऊधमपुर के सैन्य मुख्यालय में बैठकर सारी कार्रवाई को लाइव देख रहे थे। उनका कहना है कि हमारे टारगेट भी टेररिस्ट लांच पैड थे। हमारी टीमों ने पीर पंजाल और कश्मीर रीजन में मल्टीपल टारगेट को ध्वस्त किया। उन्होंने बताया कि वापस आने के लिए अलग रूट का इस्तेमाल किया गया। एक टीम में 30 से 35 लोग थे। एक टीम को एक टारगेट दिया गया था। बगैर खरोंच लगे हमारे सभी जवान सर्जिकल स्ट्राइक के बाद वापस लौट आए। यह बड़ी बात है।

सर्जिकल स्ट्राइक की प्लानिंग और उसकी जानकारी कितने लोगों को थी इसके बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि मेरे हेडक्वार्टर उधमपुर में पूरी प्लानिंग हुई। दिल्ली में डायरेक्टोरेटऑफ मिलिट्री ऑपरेशन को इसकी जानकारी थी। जम्मू-कश्मीर स्थित आर्मी के 15 और 16 कोर को ये खबर दी गई थी।

सूरज निकलने के बाद टीमें लौटीं
पहली स्ट्राइक और अंतिम स्ट्राइक के बीच चार घंटे का वक्त था। हमें सबसे ज्यादा फिक्र अंतिम स्ट्राइक करने वाली टीम को लेकर थी। यह टीम अंतिम स्ट्राइक के लिए काफी अंदर तक गई थी। सुबह सूरज निकलने के बाद यह टीम लौटी। उस दौरान एलओसी पर हमारी तरफ से कवर फायरिंग भी हुई थी। रूट काफी अच्छे तरीके से सेलेक्ट किया गया था। जब तक वहां पहुंचकर हमने हमला नहीं किया तब तक पाकिस्तान की सेना को इस बात की भनक नहीं थी। लांच पैड के नजदीक पाकिस्तानी सेना के शिविर थे जहां से फायरिंग हुई थी। हमने अपने कैजुअल्टी को लेकर भी प्लानिंग की थी या फिर अगर कोई टीम वहां फंस जाती है तो उसे किस तरह से बाहर निकालना है। यह पूरी प्लानिंग हमने पहले से कर रखी थी। हमारे लिए जरूरी था कि हमारा हरेक जवान वापस आए। एक आदमी भी छूटना नहीं चाहिए।

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