भारतीय रेलवे ने कुछ अच्छी घोषणाओं के रूप में देशवासियों को दुर्गा पूजा का उपहार दिया है। हालांकि घोषणाओं के अगले दिन ही मुंबई के एलफिंस्टन रेलवे स्टेशन पर मची जानलेवा भगदड़ ने लोगों की खुशी थोड़ी फीकी कर दी। भारतीय रेलवे अपनी एलीट ट्रेनों, जैसे राजधानी, शताब्दी और दुरंतो में लागू फ्लेक्सी फेयर टिकट सिस्टम की समीक्षा भी कर रही है। उसने संकेत दिया है कि इनके किराये में कटौती की जा सकती है, साथ ही यह भी कहा है कि अन्य ट्रेनों का किराया बढ़ाने की अभी कोई योजना नहीं है। फ्लेक्सी फेयर सिस्टम को लागू करने के एक साल से कम समय में रेलवे को इससे करीब 540 करोड़ रुपये की कमाई हुई है लेकिन बढ़े हुए किराये को लेकर रेलवे को ढेरों शिकायतें भी मिली हैं। रेल मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि किराया इस तरह रखा जाएगा कि यात्रियों की जेब पर बोझ न बढ़े और रेलवे को पर्याप्त राजस्व भी मिलता रहे।

1 नवंबर से करीब 700 गाड़ियों की गति तेज करने का भी प्रस्ताव है जिससे 48 मेल और एक्सप्रेस रेलगाड़ियों को सुपरफास्ट श्रेणी में बदला जा सकेगा। रेलवे सुरक्षा को लेकर भी नई योजनाएं लागू की जाएंगी। पीयूष गोयल ने कहा कि जहां भी जरूरत होगी, रेल पटरियों का नवीनीकरण किया जाएगा और सिग्नलिंग प्रणाली में सुधार किया जाएगा। जिन मार्गों पर पटरियों के नवीनीकरण की जरूरत है, वहां इसके आदेश दे दिए गए हैं। 5000 मानव रहित फाटकों को समयबद्ध तरीके से व्यवस्थित करने की योजना बनाई गई है। रेल सफर की सुरक्षा को चाक-चौबंद बनाने के लिए रेलवे इसरो की सहायता लेने पर विचार कर रही है। यात्रा को सुरक्षित बनाने में स्पेस टेक्नॉलजी के इस्तेमाल की संभावनाएं टटोली जा रही हैं। रेलवे के साथ मिलकर गूगल ने देश के 400 से अधिक स्टेशनों पर वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित किए हैं। रेलवे को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए कुछ और बदलाव भी प्रस्तावित हैं। जैसे, टिकट चेकर और आरपीएफ के जवान वर्दी में रहेंगे। निगरानी और यात्री सेवाओं में सुधार लाने के लिए मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल किया जाएगा। ट्रेनों, स्टेशनों और कार्यालयों में शत प्रतिशत इको फ्रेंडली लाइट, पंखे और एसी लगाए जाएंगे। गैंगमैन को बेसिक किट और सुविधाएं दी जाएंगी। रेलवे को लेकर अच्छी-अच्छी घोषणाएं सुनने की अब हमें आदत सी पड़ गई है। इसका रंग-रूप बदलने की बातें बहुत की जाती हैं लेकिन जमीनी हालात दिनोंदिन बदतर ही होते जाते हैं। रेलवे के नए मुखिया सचमुच कुछ करना चाहते हैं तो घोषणाओं को जमीन पर उतारने की कोशिश करें। रेलवे की कार्य संस्कृति सुधार कर वे लोगों की यात्रा को फिर से मंगलमय बना सकते हैं।

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