सैर-सपाटे के लिए विदेश गए कई ब्रिटिश नागरिकों को सोमवार की सुबह यह जानकर जबर्दस्त धक्का लगा कि उनका रिटर्न टिकट जिस एयरलाइंस का था, वह रातोंरात दिवालिया हो गई। यह हादसा मोनार्क एयरलाइंस के साथ हुआ जो दिवालिया होने से ठीक पहले तक ब्रिटेन की सबसे बड़ी एयरलाइंस कंपनियों में से एक थी। खैर, थोड़ी ही देर बाद ब्रिटिश हुकूमत की तरफ से यह घोषणा भी हुई कि बाहर फंसे ब्रिटिश नागरिक घबराएं नहीं। उन्हें अपनी जगह पर एक-दो हफ्ते और रुके रहने का इंतजाम करना पड़ेगा, तब तक उनकी ब्रिटेन वापसी का सरकारी इंतजाम हो जाएगा। बाहर फंसे यात्रियों की तादाद का अनुमान लगभग 1 लाख 10 हजार लगाया गया है। उनकी वापसी के लिए ब्रिटेन सरकार 17 एयरलाइंस के 34 जहाजों की 700 चार्टर्ड उड़ानों की व्यवस्था कर रही है। यह इंतजाम स्पेन जैसे बड़े टूरिस्ट डेस्टिनेशंस के लिए कारगर हो सकता है लेकिन मोनार्क एयरलाइंस के टिकटधारी जहां कम तादाद में होंगे, वहां चिंता के मारे वे अपनी छुट्टियों का मजा शायद ही ले सकें। इससे भी बड़ी मुश्किल है उन तीन लाख लोगों के लिए जिन्होंने इस एयरलाइंस से किसी अगली तारीख के लिए बुकिंग करा रखी है। कंपनी के दिवालिया हो जाने के बाद उन्हें अपना पैसा वापस मिलेगा या नहीं, इसे लेकर कोई कुछ कहने की हालत में नहीं है।

बीमा कंपनियां दुर्घटना का, या जहाज लेट होने से संभावित नुकसान का तो बीमा करती हैं लेकिन एयरलाइंस के दिवालिया हो जाने की स्थिति में क्षतिपूर्ति करने की कोई व्यवस्था आमतौर पर उनके पास नहीं होती। इस बारे में ब्रिटेन की सरकार भी मौन है क्योंकि उसके लिए यह देश के मान-प्रतिष्ठा से जुड़ा मसला नहीं है। एक और समस्या बोइंग और एयरबस जैसी विमान निर्माता कंपनियों की भी है जिनके पास मोनार्क एयरलाइंस की ओर से पचास से ज्यादा जहाजों की खरीद के ऑर्डर पेंडिंग हैं। खरीदार ही दिवालिया हो गया तो फिर क्या होगा निर्माण की अलग-अलग अवस्थाओं में पड़े इन जहाजों का और साथ ही इन्हें बनाने वाली कंपनियों का भी? हमारे यहां विजय माल्या की किंगफिशर तो धीरे-धीरे डूबी लेकिन एयर इंडिया की कर्जदारी इतनी है कि यह कोई प्राइवेट कंपनी होती तो मोनार्क जैसा हाल इसका कब का हो चुका होता।

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