नई दिल्ली। तीनों सेनाओं के प्रमुख छह दिन की मैराथन बैठक में देश के समक्ष विद्यमान चुनौतियों पर चर्चा करने जा रहे हैं। तीनों डोकलाम विवाद पर बात करेंगे तो जम्मू-कश्मीर के हालात भी उनके एजेंडे पर रहेंगे। कांफ्रेंस नौ अक्टूबर से शुरू होगी।

सूत्रों का कहना है कि बैठक में सबसे अहम मुद्दा डोकलाम रहने वाला है। पड़ोस में ताकतवर चीन मौके के इंतजार में बैठा है। इतिहास पर गौर किया जाए तो लगता नहीं है कि 73 दिनों तक चला डोकलाम विवाद खत्म हो चुका है। चीन किस मसले पर फिर से तनातनी शुरू कर दे, कहा नहीं जा सकता। ऐसे में सेनाओं की तैयारी व रणनीति किस तरह की रहे, इस पर व्यापक विमर्श किया जाएगा। गौरतलब है कि सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने डोकलाम विवाद खत्म होने के कुछ दिनों बाद ही कहा था कि हालात अभी सामान्य नहीं होने जा रहे। पड़ोसी मुल्क चीन फिर आंखें तरेर रहा है।

सैन्य प्रमुख जम्मू-कश्मीर के हालात को लेकर भी चर्चा करेंगे। पाकिस्तान समर्थित आतंकी जिस तरह से आए दिन भारत में घुसकर उत्पात मचा रहे हैं, उससे सेना को सीधी चुनौती मिल रही है। ऐसे में ये सवाल अहम है कि किस तरह से इन्हें सीमा में घुसने से रोका जाए। इस दौरान रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी अधिकारियों से संवाद स्थापित करेंगी। सूत्रों का कहना है कि बैठक में सैन्य सुधारों पर भी बात की जाएगी। 57 हजार अधिकारियों व जवानों की तैनाती फिर से करने को लेकर सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है। ले. जनरल डीबी शेकतकर की समिति ने सुधारों के लिए सरकार से सिफारिश की थी, इसमें संसाधनों को बेहतर बनाने के साथ मारक क्षमता में बढ़ोतरी के लिए दोबारा तैनाती की बात कही गई थी।

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