ऋषिकेश: भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी कर्णप्रयाग रेल परियोजना के बाद उत्तराखंड के चारों धाम को भी रेल सेवा से जोड़ने का खाका तैयार हो चुका है। इसके तहत चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री का रेकी सर्वे पूरा कर लिया गया है। साथ ही रेल विकास निगम जल्द ही एयर बोर्न मैग्नेटिक सर्वे तकनीकी से यहां सर्वेक्षण का काम शुरू करने जा रहा है।

पहाड़ पर रेल चढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे ने अपनी महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को गति दे दी है। हालांकि, अभी परियोजना के द्वितीय चरण के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की विधिवत स्वीकृति का इंतजार है।

सैद्धांतिक स्वीकृति मंत्रालय बीते वर्ष 29 अगस्त को दे चुका है। रेल लाइन के प्रथम चरण में निर्माण कार्य काफी हद तक आगे बढ़ चुका है। ऋषिकेश में बनने वाला पहला रेलवे स्टेशन भी अब आकार लेने लगा है। ऋषिकेश के निकट वीरभद्र रेलवे स्टेशन से न्यू ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को जोड़ने के लिए रेल लाइन बिछाने का कार्य भी शुरू हो गया है।

यहां बाइपास मार्ग पर रेल अंडर ब्रिज (आरयूबी) व देहरादून मार्ग पर रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) के अलावा चंद्रभागा नदी पर पहले रेल पुल के निर्माण का कार्य भी शुरू हो चुका है। द्वितीय चरण में ढालवाला से शिवपुरी तक रेल लाइन के लिए टनल (सुरंग) का निर्माण होना है।

ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक 125 किलोमीटर लंबी रेल लाइन को 18 सुरंग व 18 पुलों से होकर गुजरना है। बहरहाल! परियोजना के द्वितीय चरण की विधिवत स्वीकृति मिलने के बाद काम में तेजी आने की उम्मीद है।

इसके साथ ही रेल विकास निगम ने उत्तराखंड के प्रसिद्ध चारों धाम को भी रेल नेटवर्क से जोड़ने का खाका तैयार किया है। इस प्रस्तावित चारधाम रेल लाइन के लिए रेल विकास निगम रेकी सर्वे करा चुका है। जल्द ही इस स्वप्निल परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए निगम नई तकनीकी पर आधारित एयर बोर्न मैग्नेटिक सर्वे शुरू करने जा रहा है।

निगम की ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के परियोजना प्रबंधक ओमप्रकाश मालगुड़ी ने बताया कि बदरीनाथ व केदारनाथ के लिए कर्णप्रयाग से, जबकि गंगोत्री व यमुनोत्री के लिए डोईवाला रेलवे स्टेशन से रेल लाइन बिछाने की योजना है। इसके लिए जल्द ही नई तकनीकी के आधार पर सर्वे होगा।

प्रस्तावित चारधाम रेल नेटवर्क

चारधाम को जोड़ने वाले प्रस्तावित रेल नेटवर्क के तहत बदरीनाथ धाम के लिए कर्णप्रयाग से साईकोट होते हुए रेल लाइन जोशीमठ पहुंचेगी। केदारनाथ धाम के लिए कर्णप्रयाग से साईकोट होते हुए रेल लाइन सोनप्रयाग पहुंचेगी।

वहीं, गंगोत्री धाम के लिए मुख्य रेल लाइन डोईवाला से उत्तरकाशी पहुंचेगी। जबकि, उत्तरकाशी से मनेरी गांव में रेल स्टेशन बनेगा। यमुनोत्री के लिए उत्तरकाशी से पालर गांव तक रेल लाइन बिछाई जाएगी।

कर्णप्रयाग रेल परियोजना के परिणाम करेंगे दिशा निर्धारित

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के उत्साही परिणाम ही चारधाम रेल नेटवर्क की दशा व दिशा निर्धारित करेंगे। हालांकि, रेल विकास निगम की मानें तो अब तक के सर्वे रेल परियोजना के लिए उत्साहजनक हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की असल चुनौती द्वितीय चरण के काम में ही है। यहां 125 किलोमीटर लंबी रेल लाइन 105 किलोमीटर का सफर 18 सुरंगों के भीतर तय करेगी। इस रेल लाइन पर 18 पुल भी बनने हैं। परियोजना प्रबंधक ओमप्रकाश मालगुड़ी ने बताया कि परियोजना की पहली टनल के लिए डिटेल डिजाइन कंसलटेंसी (डीडीसी) के लिए ग्लोबल निविदा आमंत्रित की जा रही है। परियोजना के निर्माण में सबसे नवीनतम तकनीकी को वरीयता दी जाएगी।

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