अमेरिका के लास वेगास शहर में एक संगीत समारोह में हुई गोलीबारी की घटना ने दुनिया को हिलाकर रख दिया। इसमें 59 लोगों की मौत हो गई और 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इस घटना ने अमेरिका में लगातार होने वाले ऐसे ही और हादसों की याद दिला दी है, जिनमें कोई शख्स अपनी सनक या जिद में आकर ऐसे लोगों की लाशें बिछा देता है, जिनसे उसका कुछ लेना-देना नहीं होता। लास वेगास जनसंहार को नेवाडा के निवासी 64 वर्षीय स्टीफन पैडॉक ने अंजाम दिया। अंधाधुंध गोलीबारी करने के बाद उसने खुद को भी गोली मार ली। इस घटना ने अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरी दुनिया में प्रचारित है कि ग्यारह सितंबर की घटना के बाद अमेरिका ने अभूतपूर्व आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था कायम की है।

हमारे देश की कई सिलेब्रिटीज को इसी सुरक्षा व्यवस्था के तहत कई बार अप्रिय स्थितियों से गुजरना पड़ा है। लेकिन लास वेगास की घटना से तो लगता है कि इस व्यवस्था में छेद ही छेद हैं। या फिर सारी चुस्ती केवल बाहर से आने वाले एशियाई नागरिकों के लिए हैं? आखिर हमलावर 23 भारी बंदूकें और हजारों कारतूस लेकर एक नामी-गिरामी होटल में कैसे चला गया? क्या किसी ने उसके सामान की जांच तक नहीं की? या फिर एक अमेरिकी के लिए यह आम बात है?

सोचा जा सकता है कि वह समाज, जहां 89 प्रतिशत लोग हथियारबंद हों, किस कदर बारूद के ढेर पर बैठा है। लेकिन हर साल चार-पांच बड़े झटकों के बावजूद अमेरिका की हथियार समर्थक लॉबी पीछे हटने को तैयार नहीं है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक वहां बंदूकों से हर साल औसतन 12 हजार मौतें हो रही हैं। अमेरिका में हथियार रखना बुनियादी अधिकार है। कई अमेरिकी राज्यों में बंदूक खरीदने के लिए न तो किसी परमिट की जरूरत है, ना ही इसके लिए लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन के झंझट में पड़ना होता है। अमेरिकी गन इंडस्ट्री की सालाना आमदनी 91 हजार करोड़ रुपये है।

वहां की हथियार लॉबी हथियारों पर नियंत्रण के प्रयासों का विरोध करती है। दो साल पहले ऑरेगॉन के एक कॉलेज में नौ छात्रों की हत्या के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा रो पड़े थे। उन्होंने गन पॉलिसी बनाने की मांग की थी, लेकिन 70 फीसदी सांसदों ने इसका विरोध किया। इस कारण बंदूक नियंत्रण को लेकर कोई कानून वहां आज तक नहीं बन सका। कैसी विडंबना है कि पूरी दुनिया में शांति का हल्ला मचाने वाली अमेरिका सत्ता अपने ही नागरिकों को अमन-चैन और सुरक्षित जीवन की गारंटी नहीं दे सकती। कम से कम इस हादसे के बाद तो वहां हथियारों पर पाबंदी को लेकर कोई कदम उठाया जाए!

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