ज्यादातर मां-बाप अपने बच्चे के इंटरनेट पर व्यस्त रहने की आदत से परेशान रहते हैं। ऐसे लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। एक रीसर्च के अनुसार बच्चों द्वारा ऑनलाइन की गई दोस्ती भी उतनी ही प्रभावी होती हैं जितनी कि आमने-सामने की गई दोस्ती।

युनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया द्वारा की गई एक रीसर्च में यहा बात सामने आई है कि ज्यादातर मां-बाप अपने बच्चों द्वारा टेक्सटिंग, सेल्फी और अन्य ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर चिंतित रहते हैं, लेकिन यह मामता उतना गंभीर है नहीं। डिजिटल रूप से साथ रहना भी ठीक वैसा ही है जैसा कि वास्तव में साथ रहना होता है।

रीसर्चर स्टीफन रीच कहती हैं कि कई लोगों की चिंता है की आजकल साईबर स्पेस में होने वाली दोस्ती पहले होने वाली फेस-टू-फेस दोस्ती का अपूर्ण विकल्प है। वास्तव में टेक्नॉलॉजी के द्वारा होने वाली बातचीत दोस्तों को साथ में रहने, अपने विचार बांटने और प्यार जताने के ज्यादा मौके देती है।

रीसर्च्स ने दोस्ती के 6 गुण बताए हैं – खुद के बारे में बताना, प्रमाण, साथ, सहयोग, असहमति और असहमति का निपटारा। इनमें से हर गुण के लिए डिजिटल बातचीत और फेस-टू-फेस होने वाली बातचीत में अंतर को पहचाना गया। टीम के अनुसार कुछ पहलुओं पर साइबर बातचीत के फायदे हैं तो कुछ पहलुओं के लिए यह नुकसानदेह है। इसका फायदा यह है कि दो दोस्त आपस में हमेशा कनेक्टेड रह सकते हैं। इससे दोनों का साथ और भी मजबूत होता है। वे दोनों बिना किसी तीसरे को परेशान किए आपस में बातचीत करते रहते हैं। रिपलाई करने से पहले आपको थोड़ा सोचने-समझने का वक्त भी मिलता है। वहीं इसके कुछ नुकसान भी हैं। डिजिटल स्पेस में अफवाह और गॉसिप काफी तेजी से फैलते हैं। इससे दोस्ती पर बुरा असर पड़ सकता है।

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