नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी समीक्षा बैठक में ब्याज दरों को यथावत रखने का फैसला किया है। आरबीआई ने रेपो रेट को 6 फीसद पर और रिवर्स रेपो रेट को 5.75 फीसद पर बरकरार रखा है। इसके साथ ही आरबीआई ने इकोनॉमिक ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.7 फीसद कर दिया है। आरबीआई के इस फैसले से अब सस्ते लोन का इंतजार और बढ़ गया है। गौरतलब है कि एमपीसी की अगली बैठक 5-6 दिसंबर को होगी।

बैंक रेट में कोई कटौती नहीं, एसएलआर में आई कमी: आरबीआई ने बैंक रेट और एमएसएफ (MSF) को 6.25 फीसद पर बरकरार रखा है और एसएलआर रेट में 0.5 फीसद की कटौती कर इसे 19.5 फीसद कर दिया गया है। वहीं जीवीए ग्रोथ अनुमान को घटाकर 7.3 फीसद से 6.7 फीसद कर दिया गया है।

इकोनॉमिक ग्रोथ का अनुमान घटाया: मुख्य नीतिगत दरों को यथावत रखने के साथ ही आरबीआई ने इकोनॉमिक ग्रोथ (आर्थिक विकास) का अनुमान घटाकर 6.7 फीसद कर दिया है जो कि पहले 7.3 फीसद का था।

महंगाई पर आरबीआई ने क्या कहा: वहीं महंगाई के मोर्चे पर अपना रुख व्यक्त करते हुए आरबीआई ने अक्टूबर मार्च अवधि के दौरान सीपीआई इन्फ्लेशन के 4.2 से 4.6 फीसद तक रहने का अनुमान लगाया है। आरबीआई ने कहा कि महंगाई दर को 4 फीसद पर बनाए रखना मुख्य लक्ष्य है।

सिर्फ एक सदस्य ने जताई असहमति: मौद्रिक समीक्षा नीति के सिर्फ एक सदस्य ने इस फैसले पर असहमति दर्ज कराई है। एमपीसी सदस्य ढोलकिया का मानना था कि आरबीआई को नीतिगत दरों में 0.25 फीसद की कटौती करनी चाहिए थी।

आरबीआई के फैसले पर एपिक रिसर्च ने क्या कहा: एपिक रिसर्च के सीईओ मुस्तफा नदीम ने कहा, “आरबीआई की आज की समीक्षा बैठक बाजार की उम्मीदों के लिहाज से तटस्थ थी। बाजार की इसी की अपेक्षा कर रहा था। आरबीआई का तटस्थ रुख उसके उस लक्ष्य के लिहाज से तर्कसंगत है जो कि मध्यम अवधि की महंगाई की 4 फीसद पर बरकरार रखना है। इस बैठक में वित्त वर्ष 2017-18 की दूसरी छमाही के लिए महंगाई अनुमान को संशोधित कर 4.2 से 4.6 फीसद कर दिया गया है। मुद्रास्फीति के रूख में थोड़ा बदलाव आया है और इसने अगस्त के बेस इफेक्ट को लगभग खत्म सा कर दिया है।”

आपको बता दें कि इंडस्ट्री समेत सरकार को भी इस बार आरबीआई से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद थी, हालांकि कुछ बैंकर्स ने यह कहा था कि आरबीआई नीतिगत दरों में बदलाव नहीं करेगा। गौरतलब है कि आरबीआई ने अगस्त महीने में हुई अपनी समीक्षा बैठक के दौरान रेपो रेट को 6.25 फीसद से घटाकर 6 फीसद कर दिया था।

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