लखनऊ। प्रदेश में नगर निगम के चुनाव की तैयारी शुरु हो गई है। महापौर पद के प्रस्तावित आरक्षण की अनन्तिम अधिसूचना कल जारी की गई है। जिसके तहत राजधानी लखनऊ को पहली बार महिला महापौर मिलेगी।

इतना ही नहीं कानपुर, गाजियाबाद, वाराणसी, मेरठ व फीरोजाबाद का महापौर पद भी अबकी विभिन्न वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा। आगरा, इलाहाबाद, बरेली, मुरादाबाद, अलीगढ़, झांसी व अयोध्या का महापौर पद सामान्य वर्ग के लिए रहेगा जिस पर कोई भी चुनाव लड़ सकेगा। सूबे के नगर निगमों के महापौर पद के प्रस्तावित आरक्षण की देर रात जारी अनन्तिम अधिसूचना के मुताबिक मथुरा व मेरठ का महापौर पद जहां अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रहेगा वहीं फीरोजाबाद, वाराणसी, सहारनपुर व गोरखपुर पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित होगा। प्रस्तावित आरक्षण पर 20 अक्टूबर तक आपत्तियां दर्ज करायी जा सकती है।

दरअसल, महापौर पद का आरक्षण सूबे के शहरी क्षेत्र में अनुसूचित जाति की आबादी (प्रतिशत में) के आधार पर किया जाता है। पदों की संख्या का निर्धारण अनुसूचित जाति व पिछड़ी जाति की आबादी के समानुपात में होता है। जनगणना-2011 के तहत शहरी क्षेत्र में तकरीबन 12.64 फीसद अनुसूचित जाति की आबादी है इसलिए 16 नगर निगम होने के बावजूद महापौर के दो (मथुरा व मेरठ) ही पद इस बार भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए गए हैं। इसी तरह रैपिड सर्वे के मुताबिक शहरों में पिछड़ी जाति की आबादी लगभग 36.71 फीसद है लेकिन अधिकतम 27 फीसद ही पद पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित रहने के कारण महापौर के चार (फीरोजाबाद, वाराणसी, सहारनपुर व गोरखपुर) पद पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित किए गए हैं। नियमानुसार न्यूनतम 33 फीसदी महापौर के पद महिलाओं के लिए आरक्षित करने के लिए 16 नगर निगमों में से छह पद इस बार महिलाओं के लिए रखे गए हैं। अनुसूचित जाति की ज्यादा आबादी होने के कारण पहली बार नगर निगम बने मथुरा-वृंदावन का महापौर पद अनुसूचित जाति जबकि मेरठ अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित किया गया है। नए नगर निगम फीरोजाबाद व वाराणसी का महापौर पद पिछड़ा वर्ग की महिला के लिए जबकि सहारनपुर व गोरखपुर का महापौर पद अबकी पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए लखनऊ के अलावा कानपुर नगर व गाजियाबाद का महापौर पद प्रस्तावित है।

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