नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार वापस भेजने के मुद्दे पर शुक्रवार को सुनवाई की। कोर्ट ने सभी पक्षों को बहस करने का और वक्त देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 नवंबर की तारीख तय की है। कोर्ट ने कहा कि ये मानवीय समस्या है पर राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक और लेबर व भौगोलिक पहलू भी महत्वपूर्ण है।

कोर्ट ने ये भी कहा कि इस मामले मे सरकार की भूमिका कई पहलुओं पर है सरकार तो मानवीय पहलू का भी ध्यान रखना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि आतंकवादी है तो कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन निर्दोष और बच्चे आदि परेशान नही होने चाहिए। अगर कोई आकस्मिक स्थिति पैदा होती है तो याचिकाकर्ता कोर्ट मे मेंशन कर सकता है। 21 नवंबर को फिर सुनवाई होगी।

इससे पहले, 3 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में दोनों पक्ष इमोशनल पहलू पर बहस से बचें, सिर्फ कानूनी पहलू पर ध्यान दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने पिछली सुनवाई में 18 सितंबर को रोहिंग्या मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में 16 पन्नों का हलफनामा दाखिल कर कुछ कारण गिनाए थे।

तब राजनाथ ने कहा कि जो भी फैसला होगा, वो कोर्ट के मुताबिक होगा। बता दें कि दो रोहिंग्या शरणार्थियों ने केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ पिटीशन फाइल की है।

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