पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव 1,93,219 मतों से जीत कर नया इतिहास रच दिया है। यह जीत महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि इस सीट पर पहले कोई भी इतने मतों के अंतर से नहीं जीता। साथ ही कांग्रेस ने भाजपा को सीधे मुकाब़ले मे परास्त कर गुरदासपुर सीट पर कब्ज़ा किया। इस साल मार्च में कांग्रेस ने पंजाब में शिरोमणी अकाली दल और भाजपा की साझा सरकार को एक दशक बाद विपक्ष का रास्ता दिखाया था। इस जीत के साथ ही इस बात पर मोहर भी लग गई कि पंजाब मे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पार्टी के सबसे बड़े नेता है।

जाखड़ को प्रदेश में पार्टी की बागडोर दिलाने में कैप्टन ने अहम भूमिका अदा की थी। कैप्टन के लिए यह बड़ा दिलेर फैसला था कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने अपनी जगह जाखड़ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। हालांकि जाखड़ ने अबोहर विधानसभा सीट 2002, 2007 और 2012 मे जीती थी लेकिन वह अपने आखिरी दो चुनाव हार चुके थे। वह 2014 मे फिरोज़पुर लोकसभा और इस साल के विधानसभा चुनाव मे अबोहर से हार गए थे। इस बार जाखड़ को विजय तो हासिल हुई ही उन्होंने इस सीट के सभी नौ विधानसभा क्षेत्रों से बढ़त बनाए रखी। हाल के विधानसभा चुनावों मे कांग्रेस को नौ में से केवल सात में जीत मिली थी और वह सुजानपुर और बटाला हार गई थी।
कांग्रेस की जीत ने पार्टी के अंदर भी समीकरण बदल दिया है। इससे पूर्व पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा जो कैप्टन के धुर विरोधी हैं, उनकी स्थिति डांवाडोल कर दी है। 2009 लोकसभा चुनावों में मशहूर बॉलिवुड अभिनेता विनोद खन्ना को गुरदासपुर सीट से हरा कर बाजवा सुर्खियों में आए थे। खन्ना यह सीट 1998, 1999 और 2004 में जीत चुके थे और उन्होंने बाजवा को 2014 में शिकस्त देकर वापस गुरदासपुर पर अपना दबदबा कायम रखा था लेकिन इस अप्रैल में कैंसर के कारण खन्ना का निधन हो गया था। गुरदासपुर के इस प्रतिष्ठित चुनाव मे इतनी बड़ी जीत ने ना केवल जाखड़ की स्थिति पार्टी में मज़बूत की है बल्कि यह भी अविवादित कर दिया कि पंजाब में कांग्रेस अब केवल कैप्टन की राह पर चलेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here