हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी में पर्यटन का अहम योगदान है। यही कारण है कि प्रदेश में इसे उद्योग का दर्जा मिला है। हजारों लोगों की रोजी-रोटी इस कारोबार से जुड़ी है। प्रदेश में जितने अधिक पर्यटक आएंगे, उतना अधिक राजस्व सरकार के खजाने में जाएगा। लोगों को स्वरोजगार के साधन मिलेंगे और बेरोजगारी की समस्या से राहत पाने का रास्ता प्रशस्त होगा। सीधा सा कारण है कि पर्यटन विकास का लाभ कुछ लोगों को ही नहीं मिलता बल्कि कई लोगों के लिए प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से रोजगार के दरवाजे खुलते हैं। सड़क से तो प्रदेश के पर्यटन स्थलों को जोड़ा जा चुका है लेकिन रेलवे व हवाई सेवाओं का नेटवर्क बढ़ाने की जरूरत है। हवाई सेवाओं का विस्तार करने की दिशा में केंद्र सरकार ने कुछ सार्थक प्रयास किए हैं और इसका लाभ भी मिला है। शिमला व भुंतर हवाई अड्डे से ‘उड़े देश का आम आदमी’ के तहत उड़ानें शुरू हो चुकी हैं। इस साल 27 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिमला से योजना की शुरुआत की थी। अक्टूबर में भुंतर से यह सेवा शुरू हुई। निश्चित तौर पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यह सही फैसला था और पर्यटकों को राहत देने वाला। तीसरे हवाई अड्डे कांगड़ा के गगल से भी तीन उड़ानों का संचालन किया जा रहा है। समस्या यह है कि प्रदेश में हवाई जहाज के माध्यम से आने वाले पर्यटक तो काफी है, लेकिन उस लिहाज से उड़ानों की संख्या कम है। शिमला में आने वाला विमान नियमित नहीं है। कुल्लू में स्थिति थोड़ी बेहतर है। कांगड़ा धार्मिक व पर्यटन की दृष्टि से सबसे संवेदनशील है, लेकिन यहां उड़ानें बढ़ाने की दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं हो रहा। यहां से सिर्फ तीन उड़ानें हो रही हैं जबकि आने-जाने वालों की संख्या ज्यादा है। इसके पीछे छोटी हवाई पट्टी का तर्क दिया जा रहा है। केंद्र व प्रदेश सरकार को इस दिशा में पहल करनी चाहिए तथा जरूरत के मुताबिक हवाई पट्टी का विस्तार करना चाहिए। सबसे जरूरी है कि प्रदेश में आने वाली उड़ानें नियमित होनी चाहिए। प्रदेश में मौसम बड़ा फैक्टर है, जिसका हल निकाला जाना जरूरी है ताकि उड़ानों में दिक्कत न हो। धुंध और दृश्यता में कमी के कारण उड़ानें बाधित न हों, इसका स्थायी हल तलाश किया जाना चाहिए। तीनों हवाई अड्डों पर फॉग लाइट्स व आधुनिक उपकरण लगाए जाने चाहिए ताकि यात्री समय पर गंतव्य तक पहुंच सकें।

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