देवताओं के खजांची एवं धन के देवता कुबेर जी छह माह बदरीश पंचायत में बिताकर वापस पांडुकेश्वर लौट आए हैं। मान्यता है कि यात्राकाल के छह माह कुबेर जी भगवान बदरी विशाल को दिए कर्ज का ब्याज वसूलने के लिए बदरीश पंचायत में विराजते हैं। कपाट बंद होने के बाद वे पांडुकेश्वर स्थित कुबेर मंदिर में लौट आते हैं। यह प्रक्रिया पीढिय़ों से अनवरत चली आ रही है।

मान्यता के अनुसार पौराणिक काल में भगवान बदरी विशाल को निजी कार्य के लिए धन की जरूरत पड़ी। तब उन्होंने धन के देवता कुबेर से कुछ धन उधार मांगा। लेकिन, कर्ज की वापसी तो छोडि़ए, आज तक भगवान कुबेर जी को उधारी का ब्याज भी नहीं चुका पाए हैं।

प्रत्येक वर्ष बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद कुबेर जी बदरीश पंचायत में रहकर भगवान से कर्ज का ब्याज वसूलते हैं। जबकि, धाम के कपाट बंद होने पर तकरीबन एक माह तक पांडुकेश्वर स्थित योग-ध्यान बदरी मंदिर में भगवान के बाल सखा उद्धव जी के साथ रहते हैं। इसके बाद कुबेर जी को पांडुकेश्वर में ही उनके मूल मंदिर ले जाया जाता है। शीतकालीन यात्रा के दौरान यात्री भगवान के दर्शनों के धन कुबेर के दर्शन भी करते हैं। श्री बदरीनाथ धाम के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल बताते हैं भगवान के कुबेर जी लिए कर्ज का ग्रंथों में कोई उल्लेख नहीं मिलता। लेकिन, किवदंती है कि भगवान ने कुबेर जी से धन उधार लिया था। इसी धन की वसूली के लिए प्रत्येक वर्ष बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद कुबेर जी बदरीश पंचायत में विराजित रहते हैं।

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