राजस्थान विधानसभा चुनाव में अभी करीब एक वर्ष का समय बचा है, लेकिन प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अभी से चुनावी चक्रव्यूह रचने में जुट गई। वसुंधरा राजे का फोकस राजनीतिक क्षेत्र के साथ-साथ प्रशासनिक अमले पर भी है।

वसुंधरा राजे ने जहां एक ओर पांच-पांच मंत्रियों को जिलों का प्रभारी बनाकर माह में तीन दिन ग्रामीण क्षेत्रों के दौरे करने के निर्देश दिए है, वहीं आईएएस अधिकारियों को भी जिलों में जाकर लोगों से सीधे रूबरू होने के लिए कहा है। मंत्रियों और अधिकारियों को प्रत्येक माह में अपने दौरों से सम्बन्धित रिपोर्ट सीएमओ को भेजनी होगी। मंत्रियों को जिलों के दौरों के समय आम जन से जुड़े चिकित्सा, शिक्षा, जलदाय, बिजली और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों को साथ रखने के निर्देश दिए गए है, जिससे स्थानीय समस्याओं को समाधान तत्काल हो सके। जिन समस्याओं का मौके पर समाधान नहीं हो सकेगा, उनका मंत्री जयपुर पहुंचकर सम्बन्धित विभागों के प्रमुख सचिवों एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव के माध्यम से समाधान करवाएंगे। इसके साथ राज्य के सभी 10 संसदीय सचिवों को भी प्रति सप्ताह एक जिले का दौरा कर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करने के लिए कहा गया है। इन संसदीय सचिवों के साथ वसुंधरा राजे माह में दो बार बैठक करेंगी।

समस्याओं के ऑन लाइन निस्तारण के लिए विकास पोर्टल शुरू किया गया है। विकास पोर्टल पर मुख्यमंत्री सचिवालय में तैनात एक आईएएस अधिकारी निगरानी करेंगे। इस पोर्टल में शिकायत करने वाले व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर उसकी समस्या के निस्तारण को लेकर होने वाली कार्रवाई से अवगत कराया जाएगा। वसुंधरा राजे ने विभागाध्यक्षों एवं विभागों के प्रभारी सचिवों को माह में तीन दिन एक जिले का दौरा कर अपने विभाग के कामकाज की समीक्षा करने के निर्देश दिए है। वसुंधरा राजे इन अधिकारियों के साथ नियमित रूप से टेलफोन पर सम्पर्क में रहेंगी। चुनाव की तैयारियों में जुटी सीएम ने सरकार के साथ ही संगठन को भी पहले से अधिक सक्रिय किया है। इसके तहत प्रदेश प्रभारी अविनाश खन्ना ने सीएम के आग्रह पर पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों को सप्ताह में एक बार एक जिले का दौरा कर कार्यकर्ताओं से रूबरू होने के लिए कहा है । ये पदाधिकारी कार्यकर्ताओं से मिलने वाले फीडबैठ के बारे में प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी को बताएंगे और परनामी यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री तकपहुंचाएंगे। परनामी भी अब माह में 10 दिन दौरे पर रहेंगे।

अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए आगामी दिनों में दो संसदीय सीटों एवं एक विधानसभा सीट पर होने वाले चुनाव काफी अहम साबित होंगे। विस.चुनाव ठीक एक वर्ष पूर्व होने वाले इन उप चुनावों का असर आगे भी रहेगा, यही मानकर वसुंधरा राजे ने अजमेर एवं अलवर संसदीय सीटों के साथ ही मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर होने वाले उप चुनाव को लेकर भी कसरत तेज कर दी है।
हालांकि चुनाव आयोग ने अभी तक चुनाव की तारीख घोषित नहीं की,लेकिन यह संभावना जताई जा रही है कि जनवरी माह के प्रथम सप्ताह में चुनाव होंगे। इसी को देखते हुए सीएम ने अजमेर एवं अलवर संसदीय क्षेत्रों में एक-एक सप्ताह तक लगातार दौरे किए। इन दौरों में वे सीधे आम लोगों से मिली,वहीं अधिकारियों के साथ भी बैठक की । मांडलगढ़ विस.क्षेत्र में भी वे चार दिन तक दौरा कर चुकी है । उल्लेखनीय है कि अजमेर सीट पूर्व मंत्री सांवर लाल एवं अलवर सीट महंत चांदनाथ के निधन के कारण रिक्त हुई है। वहीं मांडलगढ़ विधानसभा सीट कीर्ति कुमार के निधन के कारण खाली हुई है।

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