चंडीगढ़। स्थानीय निकाय विभाग में तैनात अफसर बीते कई महीनों से मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की कार्यप्रणाली को लेकर उनसे खासे खफा और खौफ में हैं। नतीजतन अधिकारियों ने दूसरे विभागों में तबादले करवाने को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर मुख्य सचिव के दफ्तर में लाइन लगा दी है। किसी ने ट्रेनिंग का बहाना बनाकर तो किसी ने सेहत का बहाना बनाकर सिद्धू से किनारा किया है। सिद्धू से किनारा करने वालों में स्थानीय निकाय विभाग से लेकर पर्यटन व सांस्कृतिक मामलों के विभाग के अफसर शामिल हैं।

छह महीने पहले आइएएस लॉबी के साथ सिद्धू का हुआ पंगा आज तक जारी है। भ्रष्टाचार के खिलाफ सिद्धू ने जालंधर, अमृतसर व लुधियाना निगमों के कमिश्नरों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। अलबत्ता सिद्धू के अधिकार क्षेत्र में आइएएस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं है, लेकिन उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में कार्रवाई की घोषणा की थी। मामले को लेकर आइएएस लॉबी एकजुट हो गई और मुख्यमंत्री कार्यालय से इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई।

सिद्धू को जब इस बात या अहसास हुआ कि आइएएस के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार उनके पास नहीं है, तो उन्होंने इस मामले में कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से सिफारिश की थी। इसके बाद बाद आज तक न तो मामले को लेकर कार्रवाई की गई और न ही सिद्धू ने दोबारा मामला उठाया।

विकास कार्यों में पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए कथित घोटालों में सिद्धू आइएएस अधिकारियों पर कार्रवाई तो आज तक नहीं करवा सके, लेकिन निगमों में तैनात चार एसई को जरूर नाप दिया गया। अधिकारियों ने भी बाद में अदालत में सिद्धू के फैसले के लिए चुनौती दी और राहत मिल गई।

इसके बाद, स्थानीय निकाय व पर्यटन विभाग में सिद्धू द्वारा चलाई जा रही भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम व सिद्धू की कार्यप्रणाली पर कोई भी अधिकारी खरा नहीं उतर पा रहा है। नतीजतन आठ माह के कार्यकाल में आठ से ज्यादा आइएएस व पीसीएस अफसरों ने अपने तबादले दूसरे विभागों में करवा लिए।

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